पंजाब के पटियाला जिले में प्रवासी मजदूरों को गांव छोड़ने का फरमान जारी किया गया है. गांव के लोगों ने पंचायत कर यह फैसला लिया है. जिले के नाभा ब्लॉक के गांव चहल में पंचायत ने गांव में किराए पर रह रहे 4 से 5 हजार प्रवासी मजदूरों को निकालने का आदेश सुनाया है. यह फरमान बीते रविवार को गांव की पंचायत द्वारा जारी किया गया. फरमान के बाद कई प्रवासी मजदूर अपने किराए के घरों को छोड़कर चले गए हैं.
गांव के दो निवासी सुखराज सिंह नोनी और शमशेर सिंह ने बताया कि गांव में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रह रहे थे, जिससे अपराध और अन्य घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. इसी कारण पंचायत ने यह फैसला लिया. दूसरी ओर पुलिस ने बताया कि उन्होंने स्थिति को शांत कर दिया है.
एक अप्रैल तक का दिया था समय
पंजाब में प्रवासी मजदूर कृषि और उद्योगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. लेकिन हाल ही में कुछ गांवों में प्रवासी मजदूरों को निकालने की घटनाएं बढ़ी हैं. इसी कड़ी में नाभा ब्लॉक के चहल गांव में पंचायत ने यह निर्णय लिया है. आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रवासी मजदूर उपद्रव करते हैं और अपराध बढ़ा रहे हैं. पंचायत ने उन्हें 1 अप्रैल तक गांव छोड़ने का समय दिया था, जिसके चलते कई मजदूर पहले ही निकल चुके हैं. उनके छोड़े हुए किराए के मकानों पर लगे ताले इस बात की गवाही दे रहे हैं.
पुलिस ने किया पांच पर केस
हालांकि, जब इस मुद्दे पर पंचायत सरपंच और अन्य सदस्यों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया. लेकिन गांव के दो व्यक्तियों ने आगे आकर कहा कि वे प्रवासी मजदूरों को गांव में रहने नहीं देंगे। वहीं, कुछ लोग इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं, लेकिन वे भी सार्वजनिक रूप से कुछ बोलने से बच रहे हैं. पुलिस ने गांव के पांच व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है ताकि माहौल खराब न हो.
पूरे गांव के लोगों ने लिया फैसला
गांव चहल के निवासी सुखराज सिंह नोनी और शमशेर सिंह ने बताया कि गांव के पास स्थित फैक्ट्री में लगभग 7 हजार प्रवासी मजदूर काम कर रहे हैं. उनके आने के बाद से चोरी और अन्य आपराधिक घटनाएं बढ़ गई हैं. पंचायत बनने से पहले ही यह शर्त रखी गई थी कि प्रवासी मजदूरों को गांव से निकाला जाएगा. पंचायत ने पूरे गांव की सहमति से यह फरमान जारी किया था. हालांकि, कुछ स्थानीय लोग, जो इन मजदूरों को किराए पर रखते थे, इसका विरोध कर रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं.
पुलिस ने दी चेतावनी
उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल उनके गांव का फरमान नहीं है, बल्कि आसपास के करीब 10 गांवों की पंचायतों ने भी ऐसा ही आदेश जारी किया है. लेकिन पुलिस ने केवल उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है और उन्हें धमकाया जा रहा है. पंचायत के लोग इस वजह से कैमरे के सामने आने से कतरा रहे हैं. पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी है कि अगर वे कोई बयानबाजी या प्रदर्शन करेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
गांव के कुछ लोग समर्थन में
नाभा की तहसील थाना सदर भादसों के इंचार्ज जसप्रीत सिंह ने बताया कि गांव में किराए पर रह रहे प्रवासी मजदूरों को निकालने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. उन्हें गांववासियों की तरफ से एक लिखित शिकायत मिली थी कि मजदूरों को न निकाला जाए. इसके अलावा पांच शरारती तत्वों के खिलाफ अस्थायी रूप से मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति शांत है, और दोनों पक्षों को समझा दिया गया है.