Friday, January 16, 2026

यमुना प्रदूषण पर रहेगी पैनी नजर, दिल्ली में लगेंगे 41 रीयल-टाइम मॉनिटरिंग स्टेशन

Yamuna pollution नई दिल्ली : दिल्ली की यमुना नदी सालों से सीवेज और इंडस्ट्रियल कचरे की वजह से जिंदगी की सांसें लेने को तरस रही है लेकिन अब बड़ा कदम उठाया जा रहा है. मार्च 2026 तक यमुना और उसमें गिरने वाली प्रमुख नालियों पर 41 रीयल-टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग स्टेशन (OLMS) लगाए जाएंगे. अधिकारी बताते हैं कि इससे पहली बार प्रदूषण के स्तर में अचानक बढ़ोतरी (स्पाइक) को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा, ठीक वैसे ही जैसे हवा की क्वालिटी का AQI दिखता है.

Yamuna pollution रोकने के लिए अभी क्या है व्यवस्था?

फिलहाल दिल्ली में यमुना की पानी की क्वालिटी को रीयल-टाइम में मॉनिटर करने की कोई व्यवस्था नहीं है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) हर महीने सिर्फ 8 जगहों से सैंपल लेती है, लैब में जांच कराती है और रिपोर्ट वेबसाइट पर डालती है. इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ने पर तुरंत कार्रवाई मुश्किल हो जाती है.

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प्रोजेक्ट का प्लान और टाइमलाइन

यह प्रोजेक्ट पिछले साल मई में घोषित हुआ था। शुरू में 32 स्टेशन लगाने की बात थी, लेकिन बोली नहीं मिलने पर अगस्त में टेंडर बढ़ाकर 41 कर दिया गया। इसमें 5 साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है। DPCC बोर्ड मीटिंग में हाल ही में इसे मंजूरी मिली।.अधिकारी के अनुसार, महीने के अंत तक कॉन्ट्रैक्ट अवॉर्ड हो जाएगा और इंस्टॉलेशन के बाद दो महीने में यानी मार्च तक सभी स्टेशन चालू हो जाएंगे.

यह प्रोजेक्ट पिछले साल मई में घोषित हुआ था. शुरू में 32 स्टेशन लगाने की बात थी, लेकिन बोली नहीं मिलने पर अगस्त में टेंडर बढ़ाकर 41 कर दिया गया. इसमें 5 साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है. DPCC बोर्ड मीटिंग में हाल ही में इसे मंजूरी मिली. अधिकारी के अनुसार, महीने के अंत तक कॉन्ट्रैक्ट अवॉर्ड हो जाएगा और इंस्टॉलेशन के बाद दो महीने में यानी मार्च तक सभी स्टेशन चालू हो जाएंगे.

कहां-कहां लगेंगे स्टेशन?

6 स्टेशन यमुना नदी के मुख्य पॉइंट्स पर लगेंगे. वहीं 35 स्टेशन दिल्ली और एनसीआर की प्रमुख नालियों पर हैं, जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से यमुना में गंदगी डालती हैं. ये स्टेशन फ्लो, pH, BOD, COD, TSS, टोटल नाइट्रोजन, टोटल फॉस्फोरस, अमोनियम, डिसॉल्व्ड ऑक्सीजन, तापमान और कंडक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर्स को लगातार मापेंगे. डेटा सीधे DPCC सर्वर पर जाएगा.

प्रदूषण का मुख्य स्रोत कहां?

2018 में एनजीटी की यमुना मॉनिटरिंग कमिटी ने बताया था कि दिल्ली में यमुना का सिर्फ 22 किमी लंबा हिस्सा (कुल लंबाई का 2%) ही कुल प्रदूषण लोड का 76% जिम्मेदार है. सबसे ज्यादा गंदगी नजफगढ़ नाले से (करीब 70%) और शाहदरा नाले से (16%) आती है.

डेटा पारदर्शिता पर सवाल

हाल ही में अक्टूबर से DPCC ने यमुना और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का डेटा अपलोड नहीं किया था. एनजीटी के आदेश के बाद नवंबर-दिसंबर का डेटा जनवरी में जारी हुआ. एक्सपर्ट्स और एक्टिविस्ट्स कहते हैं कि समय पर और पारदर्शी डेटा बहुत जरूरी है. मानसून में हालात अलग होते हैं, लेकिन नवंबर से शुरू होने वाले सूखे सीजन का डेटा फैसले लेने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. बिना तुरंत जानकारी के सही एक्शन नहीं हो सकता.

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