हवा में गायब हो जाता है ये मिस्टर इंडिया वाला ड्रोन

नई दिल्ली। विज्ञान और रोबोटिक्स के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी सनसनीखेज ईजाद की है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्रों और निगरानी तंत्र को पूरी तरह बदल कर रख देगी। अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने एक ऐसा क्रांतिकारी ड्रोन विकसित किया है, जो उड़ान भरते ही आसमान में मिस्टर इंडिया की तरह लगभग गायब हो जाता है। इस अनूठी तकनीक को एक हालिया रोबोटिक्स कॉन्फ्रेंस में कम्प्यूटेशनल डिजाइन ऑफ ए लो-विजिबिलिटी यूएवी यूजिंग ह्यूमन-अलाइंड पर्सेप्चुअल मीट्रिक शीर्षक वाले रिसर्च पेपर के माध्यम से दुनिया के सामने पेश किया गया है।
आमतौर पर ड्रोन को अदृश्य बनाने के लिए वैज्ञानिक पारदर्शी सामग्री, कैमरा पेंट या विशेष लेंस का इस्तेमाल करते आए हैं, लेकिन ये तरीके धूप को रोकने और जमीन पर परछाईं बनने के कारण अक्सर नाकाम साबित होते थे। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस समस्या का समाधान किसी महंगे मैटेरियल से नहीं, बल्कि इंसानी दृष्टि और दिमाग की एक कमजोरी का फायदा उठाकर निकाला है। इस विशेष ड्रोन का नाम फैंटम ट्विस्ट रखा गया है, जो मोशन ब्लर यानी गति के कारण पैदा होने वाले धुंधलेपन के सिद्धांत पर कुशलता से काम करता है।
पारंपरिक क्वाडकॉप्टर ड्रोन का बीच का हिस्सा स्थिर रहता है और सिर्फ उसके पंख घूमते हैं, जिससे उन्हें आसमान में आसानी से देखा जा सकता है। इसके विपरीत, फैंटम ट्विस्ट एक सिंगल-मोटर एयरक्राफ्ट है। जब यह टेकऑफ करता है, तो इसका प्रोपेलर एक दिशा में घूमता है और ड्रोन की मुख्य बॉडी विपरीत दिशा में प्रति सेकेंड 25 बार तेजी से चक्राकार घूमने लगती है। चूंकि इंसानी आंखें एक निश्चित शटर स्पीड वाले कैमरे की तरह काम करती हैं, इसलिए इतनी तेज रफ्तार होने के कारण हमारा दिमाग ड्रोन के अलग-अलग हिस्सों को पहचान नहीं पाता। नतीजतन, वे बैकग्राउंड की रोशनी में मिलकर पूरी तरह ओझल हो जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से इसके तारों, बैटरी और अन्य पुर्जों को अलग-अलग ऊंचाई और कोणों पर फिट किया है, जिससे यह आसमान में महज रोशनी का एक मामूली सा भ्रम नजर आता है। विजिबिलिटी मॉडल के आधार पर यह नया ड्रोन आम फोर-रोटर क्वाडकॉप्टर की तुलना में 10 गुना तक कम दिखाई देता है। इस लो-विजिबिलिटी ड्रोन का विकास पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा। वन्यजीवों के संरक्षण के दौरान यह नाजुक इकोसिस्टम में बिना किसी खलल के लुप्तप्राय जीवों की सटीक निगरानी कर सकेगा, क्योंकि सामान्य ड्रोन के शोर और आकार से डरकर जानवर भाग जाते हैं।

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