नई दिल्ली: जटिल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 15 वर्षीय किशोरी तन्वी की इलाज के दौरान मौत के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हड़कंप मच गया है। तन्वी का इलाज 2012 से एम्स में चल रहा था। 1 सितंबर को उसकी मृत्यु के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और समय पर ऑपरेशन न करने के आरोप लगाए हैं। पिता मुकेश परियानी का कहना है कि यदि 2015 से 2017 के बीच बेटी की सर्जरी कर दी गई होती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एम्स प्रशासन ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
14 साल का लंबा इंतजार और शिकायतों का दौर
परिवार के अनुसार, अक्टूबर 2012 में जांच के दौरान तन्वी को 'वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट विथ पल्मोनरी एट्रेशिया' नामक गंभीर हृदय बीमारी का पता चला था। 2014 में सर्जरी के लिए आवश्यक औपचारिकताएं, वित्तीय व्यवस्थाएं और ब्लड डोनर भी पूरे कर लिए गए थे। परिजनों का आरोप है कि सितंबर 2015 में तय की गई सर्जरी को टाल दिया गया। लगातार चक्कर काटने के बाद परिजनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में भी गुहार लगाई थी। आरोप है कि शिकायत के बाद अस्पताल द्वारा शिकायत वापस लेने की शर्त पर ऑपरेशन का आश्वासन दिया गया, लेकिन सुधारात्मक सर्जरी फिर भी नहीं हुई।
2017 में सर्जरी संभव नहीं थी: एम्स प्रशासन
दूसरी ओर, एम्स प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए स्थिति स्पष्ट की है। एम्स के अनुसार, 2013 में सीटी एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथेटेराइजेशन जैसी विस्तृत जांचें की गई थीं। 2017 में विशेषज्ञों के व्यापक मूल्यांकन के बाद यह पाया गया कि बच्ची के हृदय की संरचना और बीमारी की अति-जटिलता के कारण सुधारात्मक सर्जरी (सर्जिकल रिपेयर) संभव नहीं थी। कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी (CTVS) विभाग के अध्यक्ष व वरिष्ठ सर्जनों ने परिजनों को बीमारी की स्थिति समझाते हुए केवल दवाओं के जरिए इलाज (मेडिकल मैनेजमेंट) और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी थी।
1 सितंबर को कार्डियक अरेस्ट से हुई मौत
एम्स के आधिकारिक बयान के मुताबिक, तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर तन्वी को 24 अगस्त 2026 को भर्ती कराया गया था। स्थिति को देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा था। 1 सितंबर की तड़के 2:50 बजे अचानक उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन गिरकर 48% पर आ गया। डॉक्टरों ने तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट दिया, लेकिन हाइपोक्सिक स्पेल के कारण उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। डॉक्टरों की टीम के काफी प्रयासों के बाद भी सुबह 5:06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।
फॉरेंसिक और क्लीनिकल जांच करेगी समिति
एम्स निदेशक द्वारा गठित विशेष जांच समिति तन्वी के वर्ष 2012 से लेकर 2026 तक के सभी क्लीनिकल रिकॉर्ड्स, पूर्व विशेषज्ञों की राय, इलाज के तरीकों और मौत के कारणों की विस्तृत समीक्षा करेगी। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। एम्स प्रशासन का कहना है कि ऑटोप्सी रिपोर्ट और जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल ने पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

