गिरफ्तार संदिग्धों से चौंकाने वाला खुलासा, मेवात में लगाए थे पाकिस्तान समर्थित पोस्टर

नई दिल्ली। पड़ोसी देश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और उससे जुड़े राष्ट्रविरोधी नेटवर्क की भारत में बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला भंडाफोड़ किया है। पुलिस की गिरफ्त में आए पांच देशविरोधी संदिग्धों पर संगीन आरोप है कि उन्होंने हरियाणा के मेवात, नूंह और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्टर चस्पा किए थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन विवादित पोस्टरों को लगाने के पीछे का मुख्य मकसद आईएसआई समर्थित अलगाववादी तत्वों का महिमामंडन करना तथा देश के भीतर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़कर डर और अस्थिरता का माहौल पैदा करना था।

पाकिस्तानी आकाओं के डिजिटल निर्देश और वीडियो साक्ष्य

स्पेशल सेल के आला अधिकारियों ने तकनीकी तफ्तीश के बाद खुलासा किया है कि पकड़े गए आरोपियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से पाकिस्तान से दो विशेष पीडीएफ (PDF) फाइलें भेजी गई थीं। इन डिजिटल फाइलों में सीमा पार बैठे कुख्यात हैंडलर आबिद जट्ट और शहजाद भट्टी की तस्वीरें और भड़काऊ प्रचार सामग्री मौजूद थी। भारतीय क्षेत्र में सक्रिय इन गुर्गों ने उन फाइलों का स्थानीय स्तर पर प्रिंट निकाला और योजनाबद्ध तरीके से मेरठ, नूंह, मेवात सहित कई अन्य चिन्हित ठिकानों पर करीब 40 से 50 पोस्टर चिपका दिए। पुलिस जांच में यह भी प्रमाणित हुआ है कि पोस्टर लगाने की इस देशविरोधी कृत्य के बाद आरोपियों ने सबूत के तौर पर उसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार की और उसे एन्क्रिप्टेड चैट के जरिए अपने पाकिस्तानी आकाओं को फॉरवर्ड कर दिया, ताकि वे स्थानीय युवाओं को बरगलाने के लिए आतंकी नेटवर्क का माहौल तैयार कर सकें।

कमजोर युवाओं को लालच और टारगेट किलिंग की बड़ी साजिश

स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त प्रवीण कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, पकड़े गए इन संदिग्धों को भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों की 'टारगेट किलिंग' (लक्ष्य बनाकर हत्या) करने, अपने पाकिस्तानी आकाओं का प्रचार-प्रसार करने और 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' के बैनर तले देश में दहशत का साम्राज्य स्थापित करने का बेहद खतरनाक टास्क सौंपा गया था। प्राथमिक पूछताछ में यह बात भी छनकर सामने आई है कि इस टेरर नेटवर्क के निशाने पर मुख्य रूप से समाज के आर्थिक रूप से विपन्न, बेरोजगार और आपराधिक प्रवृत्ति वाले ऐसे युवा थे, जिन्हें मोटी रकम और ऐशो-आराम की जिंदगी का झांसा देकर आसानी से देश के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके। उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस की अलग-अलग विंग और क्राइम ब्रांच ने हालिया महीनों में आईएसआई समर्थित मॉड्यूल्स के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 45 से अधिक संदिग्धों को दबोच कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा है।

तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान का सच और साजिश नाकाम

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के रणनीतिक विश्लेषण के अनुसार, 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' नाम का धड़ा वास्तव में धरातल पर कोई स्वतंत्र या कानूनी रूप से स्थापित आतंकी संगठन नहीं है। इस छद्म नाम का इस्तेमाल पहली बार इसी वर्ष तब सुर्खियों में आया था, जब इसके स्वघोषित 'अल-बुरक ब्रिगेड' ने पंजाब के अमृतसर और गुरदासपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों पर हुए जानलेवा हमलों व हत्याओं की जिम्मेदारी ली थी। जांच अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि यह केवल एक काल्पनिक नाम है, जिसे पाकिस्तान में बैठे मास्टरमाइंड भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और स्थानीय स्तर के छोटे अपराधियों द्वारा की जाने वाली वारदातों को बड़ा रूप देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से समय रहते इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया और देश को दहलाने की एक और बड़ी साजिश पूरी तरह नाकाम कर दी गई।

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