आवारा कुत्तों के हमलों से फरीदाबाद में दहशत, नगर निगम पर उठे सवाल

फरीदाबाद: औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के अलग-अलग रिहायशी इलाकों और सोसायटियों में इन दिनों खूंखार आवारा कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि मासूम बच्चों और बुजुर्गों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। शहर की सड़कों और गलियों में घूम रहे ये बेकाबू कुत्ते आए दिन मासूमों पर जानलेवा हमला कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर पूरी तरह बेपरवाह और संवेदनहीन बने हुए हैं। शहर में लगातार हो रहे इन हमलों के बावजूद निगम प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है और इन घटनाओं से कोई सबक नहीं ले रहा है। जमीनी हालात की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला नागरिक अस्पताल में बीते महज चार दिनों के भीतर ही कुत्तों के काटने से बुरी तरह जख्मी हुए मासूमों और नागरिकों के 20 नए मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।

सोसायटी बनी 'खतरे का जोन', 40 से ज्यादा कुत्तों ने छीना बच्चों का बचपन

शहर के नागरिक अस्पताल में आ रहे इन डरावने मामलों से पहले भी लगातार आवारा कुत्तों के आतंक की खबरें सामने आती रही हैं। फरीदाबाद के सेक्टर-70 स्थित मलबेरी काउंटी सोसायटी के हालात तो पिछले कई महीनों से बेहद बदतर बने हुए हैं, जहां आवारा कुत्तों का पूरा झुंड ही आतंक का पर्याय बन चुका है। इस पॉश सोसायटी के परिसर के भीतर ही वर्तमान में 40 से अधिक आवारा कुत्ते खुलेआम घूम रहे हैं, जो पार्क में खेलने वाले या स्कूल जाने वाले बच्चों को देखते ही उन पर हिंसक रूप से टूट पड़ते हैं। इस वजह से डरे-सहमे अभिभावकों ने अपने बच्चों को घरों में कैद करना शुरू कर दिया है और सोसायटी की सुरक्षा पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

हर इलाके में फैली दहशत, सुरक्षा के दावों की खुली पोल

कुत्तों के खौफ की यह कहानी सिर्फ एक सोसायटी तक सीमित नहीं है, बल्कि फरीदाबाद के कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों और रिहायशी कॉलोनियों से भी हर रोज खूंखार कुत्तों द्वारा राहगीरों को अपना शिकार बनाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस संकट के बाद भी नगर निगम की डॉग कैचिंग स्क्वाड यानी आवारा कुत्तों को पकड़ने वाली टीम धरातल से पूरी तरह नदारद है। स्थानीय आरडब्ल्यूए (RWA) और सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर कार्रवाई के दावे करता है, जबकि हकीकत में जनता को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर निकलना पड़ रहा है। यदि नगर निगम ने तुरंत इन खूंखार कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी का ठोस अभियान नहीं चलाया, तो आने वाले दिनों में यह लापरवाही किसी की जान पर बेहद भारी पड़ सकती है।

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