नई दिल्ली, 29 फरवरी 2024: देश में अपनी तरह की पहली पहल में, दिव्यांगजनों के लिए रोजगार को बढ़ावा दे रही संस्था ‘नेशनल सेंटर फॉर प्रोमोशन ऑफ इम्प्लायमेंट फॉर डिसेबल पीपुल’ (एनसीपीईडीपी) के नेतृत्व में तथा नेशनल डिसेबिलिटी नेटवर्क (एनडीएन) के सहयोग से दिव्यांगता अधिकार समूहों द्वारा गुरुवार को एक विशेष दिव्यांगता घोषणापत्र जारी किया गया.Manifesto For Disable को ‘दिव्यांग जनों के लिए और उनके द्वारा घोषणापत्र’ नाम दिया गया है. इसमें राजनीतिक दलों से आगामी लोकसभा चुनावों में दिव्यांग जनों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने और उनकी चुनौतियों का समाधान पेश करने का आग्रह किया गया है.
देश के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार एवं व्यवहार की आवश्यकता पर जोर देते हुए, दिव्यांग अधिकारों की वकालत करने वालों ने राजनीतिक दलों से आह्वान किया है कि वे दिव्यांग व्यक्तियों के एजेंडे को प्राथमिकता दें और उन्हें एक निर्णायक मतदाता समूह के रूप में स्वीकार करें.
Manifesto For Disable लोकतंत्र में दिव्यांगो की है बड़ी भूमिका
एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक श्री अरमान अली ने कहा, चुनाव आयोग के अनुसार भारत की आबादी में से 7% दिव्यांग नागरिक हैं. देश में कुल 1 करोड़ से अधिक पंजीकृत दिव्यांग मतदाता हैं. लोकसभा चुनाव 2024 नजदीक आ गया है. ऐसे में यह जरूरी है कि दिव्यांगजन की आवाज उठाई जाए. ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं है, क्योंकि उनका एक बड़ा वोट बैंक है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि दिव्यांग जन भी वस्तुओं और सेवाओं के बड़े उपभोक्ता हैं और इस प्रकार सामाजिक-आर्थिक विकास तथा सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं.
दिव्यांगता घोषणापत्र में विभिन्न हितधारकों के साथ राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर हुए व्यापक परामर्श में उभरे मुद्दों को शामिल किया गया है, जो पूरे भारत में दिव्यांग समुदाय की गंभीर चिंताओं और मांगों को समाहित करता है. एनसीपीईडीपी ने राष्ट्रीय दिव्यांगता नेटवर्क (एनडीएन) और दिव्यांगजनों के अधिकारों पर राष्ट्रीय समिति (एनसीआरपीडी) के सहयोग से, देश भर में दिव्यांग और बिना दिव्यांगता वाले 10,000 से अधिक लोगों से सुझाव आमंत्रित किया गया. इन सुझावों के आधार पर, भारत का अभूतपूर्व दिव्यांगता घोषणापत्र तैयार किया गया है, जिसमें 10 महत्वपूर्ण मांगें शामिल की गई हैं, जो देश भर के दिव्यांगजनों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं.
यह घोषणापत्र आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक दलों की 5 वर्षीय कार्ययोजनाओं में दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने को प्राथमिकता देने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देता है. दिव्यांगता घोषणापत्र बजटीय आवंटन से लेकर स्वास्थ्य बीमा, पहुंच, सामाजिक सुरक्षा, सामाजिक-राजनीतिक समावेशन, आर्थिक भागीदारी, जलवायु परिवर्तन, लैंगिक समानता, खेल और शिक्षा तक के व्यापक मुद्दों को संबोधित करता है.
घोषणापत्र की प्रमुख मांगें:
1. जारी करें. बजटीय आवंटन: दिव्यांगजनों के लिए कुल बजट आवंटन का 5% आवंटित करें; दिव्यांगता बजट विवरण
2. स्वास्थ्य बीमा: दिव्यांगजनों के लिए आयुष्मान भारत की तर्ज पर एक योजना की घोषणा करें. एक ऐसी नीति की घोषणा करें जो किफायती और सुलभ स्वास्थ्य बीमा को बढ़ावा दे और दिव्यांगजनों को भेदभाव से बचाये.
3. पहुंच: 2026 तक सभी सार्वजनिक और निजी स्थानों/ उत्पादों/ सेवाओं को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाएं। व्यवसायों के लिए अनुपालन दिशा-निर्देश पेश करें.
4. सामाजिक सुरक्षा: मासिक पेंशन बढ़ाकर राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत दिव्यांगजनों के लिए 5000 रुपये सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में दिव्यांगता को जोड़ने को प्राथमिकता दें.
5. सामाजिक-राजनीतिक समावेशन: दिव्यांग शब्द को शामिल करने के लिए अनुच्छेद 15 में संशोधन करें, शासन में 5% आरक्षण प्रदान करें और भारत के राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में दिव्यांग लोगों के लिए आरक्षण और नामांकन की व्यवस्था करें.
6. आर्थिक भागीदारी: बैकलॉग रिक्तियों को 2027 तक भरें, “कार्य तक पहुंच” योजना शुरू करें व उचित आवास प्रदान करने के लिए एमएसएमई कार्यक्रमों में दिव्यांगता को शामिल करना सुनिश्चित करें.
7. जलवायु परिवर्तन: कमजोर समुदायों के लिए समर्पित जलवायु परिवर्तन मिशन का गठन व आपदा प्रबंधन में दिव्यांगजनों के लिए वास्तविक समय डेटा संग्रह सुनिश्चित करें.
8. लैंगिक समानता: दिव्यांग लड़कियों और महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता और स्मार्टफोन पहुंच के लिए एक उप-योजना स्थापित करें, ऐसी नीतियों की घोषणा करें जो समान भागीदारी को बढ़ावा दें और दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को हिंसा और दुर्व्यवहार से बचाएं.
9. खेल: पैरा एथलीटों के लिए यूनिवर्सल डिज़ाइन के सिद्धांतों के आधार पर अत्याधुनिक खेल बुनियादी ढांचे की स्थापना करें.
10. शिक्षा: 2029 तक दिव्यांग बच्चों के लिए नामांकन बढ़ाने और मुख्यधारा की शिक्षा पूरी करने के लिए डेटा- संचालित रणनीति लागू करें. सुनिश्चित करें कि उच्च शिक्षा में नामांकन दर राष्ट्रीय सकल औसत अर्थात् 23.4% के अनुरूप हो.
दिव्यांगों को मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता
श्री अरमान अली ने जोर देकर कहा, ‘अब समय आ गया है कि हम दिव्यांगता विशिष्ट चिंताओं से आगे बढ़ें. रोजगार, पहुंच और शिक्षा पर समझौता नहीं किया जा सकता है, लेकिन हमें मुख्यधारा के मुद्दों से भी जुड़ना चाहिए. केवल एक एकीकृत आवाज बनकर ही हम वास्तव में सुने जाने की उम्मीद कर सकते हैं. हम हम राजनीतिक दलों से भी आग्रह करेंगे कि वे अपने घोषणापत्रों में न केवल दिव्यांग व्यक्तियों के एक विशिष्ट वर्ग को शामिल करें, बल्कि अपने घोषणापत्रों में घोषित सभी योजनाओं और नीतियों में दिव्यांगता संबंधी विशिष्ट चिंताओं को भी शामिल करें.
घोषणापत्र लॉन्च समारोह में विविधता एवं समान अवसर केंद्र (डीईओसी) से रामाचारी ने भाग लिया. इस सम्मेलन में राजीव राजन, कार्यकारी निदेशक एकता चेन्नई स्थित विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता, विकलांग लोगों के लिए एसोसिएशन से प्रदीप राज, आस्था से राधिका अल्काज़ी, राष्ट्रीय बधिर संघ (एनएडी) के प्रतिनिधि और अन्य लोगों के अलावा ऑल इंडिया कन्फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड के प्रतिनिधि भी शामिल थे.
दिव्यांगता घोषणापत्र राजनीतिक दलों को अपने नीतिगत एजेंडे में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए एक स्पष्ट आह्वान के रूप में कार्य करता है. यह दिव्यांगजनों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालता है और एक अधिक समावेशी और न्यायसंगत समाज की मांग करता है, जहां प्रत्येक नागरिक राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से भाग ले सके और योगदान दे सके.

