भारत ने ठुकरा दिया था रुस का ऑफर: क्या है मिग-31 लड़ाकू विमान की कहानी

नई दिल्ली। यूक्रेन के साथ संघर्ष में रूसी मिग-31 लड़ाकू विमानों ने कई यूक्रेनी विमानों को मार गिराया है। मिग-31 के साथ लंबी दूरी की आर-37एम हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया गया है। मीडिया रिपोर्ट में भारत के पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने लिखा है कि मिग-31 लड़ाकू विमान करीब बिना किसी विरोध के काम कर पाए हैं क्योंकि यूक्रेन के लड़ाकू विमानों में उनकी बराबरी करने के लिए जरूरी रेंज, गति या ऊंचाई की कमी है। आर-37एम एक्सअहेड मिसाइल और इसके अलग अलग वेरिंट को टैंकर एयरक्राफ्ट, विमानों को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस मिसाइल ने जंग के मैदान में यूक्रेनी और नाटो के विमानों को काफी दूरी पर रखा है। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2022 में यूक्रेनी वायु सेना पर हर दिन करीब छह आर-37एम मिसाइलें दागी गई थीं। इसके अलावा रूस ने क्रीमिया में भी चार मिग-31 विमानों को तैनात किए थे। मिग-31 के खतरे को खत्म करने के लिए यूक्रेन ने पिछले साल बेलबेक एयरबेस पर ड्रोन हमले किए थे ताकि उन्हें जमीन पर ही खत्म कर दिया जाए।
यूक्रेनी एयरफोर्स के मुताबिक 26 जनवरी को रूस ने एक साथ 55 मिसाइलें, 24 ईरानी मूल के शाहेद ड्रोन और एक केएच-47 खिंजल हाइपरसोनिक मिसाइल दागी थी। यूक्रेन के पास खिंजल मिसाइलों को रोकने का कोई तरीका नहीं है। ये मिसाइलें मिग-31 से ही दागी गई थी। यह ज्ञात नहीं है कि क्या अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम ऐसी मिसाइलों को रोक सकता है। रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा के मुताबिक मिग-31 एक सुपरसोनिक इंटरसेप्टर विमान है जिसे सोवियत वायु सेना ने मिकोयान डिजाइन ब्यूरो के जरिए पहले के मिग-25 की जगह लेने के लिए विकसित किया था। इसे दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू जेट विमानों में से एक माना जाता है। रूसी वायुसेना के पास ऐसे 130 विमान हैं और कज़ाकिस्तान वायु सेना के पास 20 विमान हैं।
रूसियों का दावा है कि मिग-31बीएम 2.6 गुना ज्यादा असरदार है। अपग्रेड किए गए जसलोन-एम रडार की हवाई लक्ष्यों को पहचानने की रेंज, एईडब्ल्युएंडसी साइज़ के विमानों के लिए बढ़ाकर 400 किलोमीटर कर दी गई है। यह विमान अपने-आप 24 लक्ष्यों तक को ट्रैक कर सकता है और एक ही समय में आठ लक्ष्यों पर हमला कर सकता है। नई लंबी दूरी की मेक6 आर-37 मिसाइल की रेंज 400 किलोमीटर तक है। मिग-31बीएम में कई तरह की भूमिकाएं निभाने की क्षमता है। यह एंटी-रडार, हवा से जहाज़ पर मार करने वाली और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें ले जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक चार मिग-31 इंटरसेप्टर विमानों के एक समूह के बीच डेटा लिंक का इस्तेमाल किया गया है जिससे 900 किलोमीटर लंबे मोर्चे पर पूरी तरह से दबदबा बनाया जा सकता है। रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने बताया है कि उन्होंने इस विमान को उड़ाया है। 28 मई 1999 को मॉस्को से 400 किलोमीटर पूरब में स्थित निज़नी नोवगोरोड के सोकोल एयरक्राफ्ट प्लांट में उन्होंने रूसी पायलट अलेक्जेंडर जॉर्जेविच कोनोवालोव के साथ मिग-31बी विमान को उड़ाया था। उन्होंने लिखा है कि सीधी उड़ान के दौरान विमान ने बहुत तेजी से गति पकड़ी और ऐसा लगा मानो कोई पीछे से जबरदस्त ताकत लगाकर उसे आगे धकेल रहा हो।

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