9 साल में 70% बढ़ी बवाना प्लांट की बिजली की कीमत, डिस्कॉम पर बढ़ा लागत का दबाव

नई दिल्ली: गर्मियों के पीक सीजन के दौरान राजधानी दिल्ली को अपनी कुल बिजली की जरूरत का महज लगभग 10% हिस्सा ही अपने स्वयं के पावर प्लांटों से मिल पाता है। इसमें भी सबसे अधिक बिजली बवाना स्थित गैस टर्बाइन पावर प्लांट से प्राप्त होती है। हालांकि, कोयला आधारित अन्य पावर प्लांटों के मुकाबले यहाँ से बिजली खरीदना काफी महंगा साबित हो रहा है, जिसका सीधा वित्तीय बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।

70% से अधिक की बढ़ोतरी

आंकड़ों के मुताबिक, बवाना के गैस टर्बाइन पावर प्लांट से मिलने वाली बिजली की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ी हैं। वर्ष 2017-18 में जहां इस प्लांट से मिलने वाली बिजली की दर मात्र 6.37 रुपये प्रति यूनिट थी, वहीं अब यह बढ़कर 10.87 रुपये प्रति यूनिट पर पहुँच गई है। इसका मतलब है कि पिछले 9 वर्षों में इसके दरों में 70 प्रतिशत से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

दिल्ली सरकार के पावर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, बवाना के गैस टर्बाइन प्लांट से सबसे अधिक करीब 350 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। इसके अलावा, लगभग 150 मेगावाट बिजली प्रगति पावर प्लांट से मिलती है, जबकि कुछ मात्रा में बिजली नगर निगम (MCD) के वेस्ट-टु-एनर्जी प्लांटों से भी प्राप्त होती है।

गैस आधारित बिजली का बढ़ता खर्च

राजधानी के ये गैस आधारित पावर प्लांट बिजली की भारी मांग (Peak Demand) के समय बेहद अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन प्राकृतिक गैस की लगातार बदलती कीमतों और इसकी उपलब्धता में कमी के कारण इनसे बिजली का उत्पादन करना काफी खर्चीला हो जाता है। नियामक आयोग (DERC) के रिकॉर्ड में भी बवाना समेत अन्य गैस आधारित प्लांटों की कम लागत-प्रभावशीलता और गैस की उपलब्धता से जुड़ी अड़चनों का जिक्र मिलता है। जानकारों के अनुसार, पीक सीजन के दौरान अतिरिक्त बिजली खरीद की लागत भी काफी अधिक बनी रहती है।

Latest news

Related news