नई दिल्ली। क्या पासपोर्ट, वोटर आई, आधार कार्ड नागरिकता के लिए दस्तावेज है? इन सवालों पर आए दिन विवाद होते रहते हैं। सच यह है कि भारतीय नागरिकता का निर्धारण संविधान और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है, जबकि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 विदेश यात्रा के लिए दस्तावेज जारी करने की व्यवस्था है। वोटर कार्ड वोटिंग के लिए है और आधार पहचान पत्र है। संविधान लागू होने के समय भारत में निवास करने वाले और भारत से संबंध रखने वाले लोगों को नागरिकता दी गई। इसमें वे लोग शामिल थे जो भारत में जन्मे थे, जिनके माता-पिता में से कोई भारत में जन्मा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विभाजन के बाद भारत आए लोगों, पाकिस्तान गए और वापस लौटे लोगों और विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की नागरिकता के नियम बनाए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो सकती है। अनुच्छेद 10 और 11 संसद को नागरिकता से जुड़े कानून बनाने का अधिकार देते हैं। यह उन लोगों पर लागू होता है, जिनका जन्म भारत में 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच हुआ हो। इसके बाद हुए जन्मों के लिए जरुरी है कि कम से कम माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो।
वंश/पैतृक आधार यह उन व्यक्तियों पर लागू होता है जिनका जन्म भारत के बाहर हुआ हो और जन्म के समय उनके माता-पिता भारतीय नागरिक रहे हों। पंजीकरण यह भारतीय मूल के व्यक्तियों या भारतीय नागरिकों से विवाह करने वाले उन लोगों के लिए है, जो निर्धारित निवास संबंधी शर्तों को पूरा करते हों। प्राकृतिककरण द्वारा यह उन विदेशी नागरिकों के लिए है जो भारत में कानूनी रूप से निवास करते हैं और भाषा, चरित्र तथा निवास अवधि से संबंधित आवश्यक शर्तों को पूरा करते हैं। क्षेत्र के भारत में विलय द्वारा यदि कोई नया क्षेत्र भारत का हिस्सा बन जाता है, तो उस स्थिति में नागरिकता प्राप्त हो सकती है।
पासपोर्ट एक अहम सरकारी पहचान दस्तावेज है, लेकिन यह नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं है। पासपोर्ट विदेश यात्रा की अनुमति देने वाला दस्तावेज है। किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने के लिए जन्म रेकॉर्ड, माता-पिता की नागरिकता, सरकारी रेकॉर्ड और नागरिकता कानून के तहत अन्य प्रमाण देखे जा सकते हैं। आधार कार्ड पहचान पत्र है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। भारत सरकार द्वारा अपने निवासियों और नागरिकों को यह जारी किया जाता है।
इसी तरह, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का प्रत्येक भारतीय नागरिक वोट देने का अधिकार रखता है। हर योग्य नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकता है। इसमें जाति, धर्म, नस्ल, लिंग या सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। 1989 में संविधान संशोधन के जरिये 21 साल से घटाकर मतदान की उम्र 18 वर्ष कर दी गई। हालांकि, वोट देने का अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है, लेकिन कानून में तय कुछ कारणों से किसी व्यक्ति को मतदान से अयोग्य किया जा सकता है। भारतीय चुनावों में वोट देने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को है।
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ज्ञानंत सिंह कहते हैं कि हम खुद ही घोषित करते हैं कि भारतीय संविधान और सिटीजनशिप एक्ट के तहत हम भारत के नागरिक हैं। यही क्वेश्चन ऑफ फैक्ट है। हम संविधान और कानूनी क्राइटेरिया में आते हैं तो हम भारत के नागरिक हैं और इसके लिए कोई अलग से दस्तावेज नहीं है। हां यह बात तय है कि इसी क्राइटेरिया के आधार पर पासपोर्ट, वोटर आईकार्ड या आधार कार्ड आदि बनता है। यानी पासपोर्ट और वोटर आई कार्ड भारतीय नागरिक को ही मिलेगा, लेकिन पासपोर्ट और वोटर आई कार्ड होना नागरिकता दस्तावेज नहीं है।

