चौकीदार की बेरहमी से हत्या, हाथ-पैर बांधकर उतारा मौत के घाट; 4 नाबालिग फरार

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से कानून और सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिला मुख्यालय में स्थित बाल संप्रेक्षण गृह (जुवेनाइल होम) की कड़ी सुरक्षा को भेदते हुए वहां बंद चार बाल अपचारियों (कानून से संघर्षरत किशोरों) ने ड्यूटी पर तैनात एक सुरक्षाकर्मी की कथित तौर पर बर्बरता से हत्या कर दी। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात को अंजाम देने के बाद चारों आरोपी मौके का फायदा उठाकर वहां से रफूचक्कर हो गए। आधी रात को हुई इस खूनी वारदात की खबर जैसे ही बाहर आई, पुलिस महकमे और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जिले की सीमाएं सील कर दी गई हैं और फरार हुए इन खतरनाक किशोरों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

क्रूरता की हदें पार: हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा और गला घोंटकर ली जान

इस वीभत्स हत्याकांड को लेकर जो शुरुआती और प्राथमिक जानकारियां सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली हैं। यह पूरी घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी देर रात की बताई जा रही है। प्राप्त विवरण के अनुसार:

  • संप्रेक्षण गृह के भीतर बंद चार शातिर बाल कैदियों ने पहले से तय एक सोची-समझी साजिश के तहत वहां तैनात सुरक्षाकर्मी को अपने जाल में फंसाया।

  • उन्होंने अचानक सुरक्षाकर्मी पर हमला बोल दिया और उसके साथ जमकर मारपीट की। जब वह अधमरा हो गया, तो आरोपियों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए उसके हाथ और पैर रस्सी से कसकर बांध दिए।

  • इसके बाद, वह चिल्ला न सके और मदद के लिए किसी को बुला न पाए, इसके लिए उन्होंने उसके मुंह के भीतर सूती गमछा बेहद बेरहमी से ठूंस दिया और फिर उसका गला दबाकर उसे मौत की नींद सुला दिया। जब उन्हें यकीन हो गया कि सुरक्षाकर्मी की सांसें थम चुकी हैं, तो वे उसकी जेब से चाबियां निकालकर मुख्य गेट खोलकर वहां से भाग निकले।

तखतपुर के रहने वाले थे मृतक नरेंद्र; परिजनों ने प्रबंधन पर लगाए साजिश के गंभीर आरोप

इस जघन्य हत्याकांड का शिकार हुए अभागे सुरक्षाकर्मी की पहचान 40 वर्षीय नरेंद्र कुमार खांडे के रूप में की गई है। वे मुख्य रूप से बिलासपुर जिले के ही तखतपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अरईबंद के निवासी थे। नरेंद्र पिछले करीब एक साल से इस बाल संप्रेक्षण गृह में पूरी ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे थे।

इस बीच, इस दुखद घटना के बाद मृतक नरेंद्र कुमार के आक्रोशित परिजनों ने संस्थान के प्रबंधन और कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का सीधा आरोप है कि इतनी कड़ी सुरक्षा वाले सरकारी परिसर के भीतर एक अकेले सुरक्षाकर्मी की इस तरह हत्या कर देना बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं है। उन्होंने इस पूरी वारदात के पीछे संस्थान के कुछ बड़े और जिम्मेदार अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका होने का दावा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग की है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है।

केंद्रीय जेल भेजने की हो रही थी तैयारी; हत्या और दुष्कर्म जैसे संगीन मामलों के आरोपी हैं फरार बंदी

अंदरूनी सूत्रों और पुलिस रिकॉर्ड से जो बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे इस घटना को और अधिक गंभीर बनाती हैं। बताया जा रहा है कि फरार हुए इन चार बाल अपचारियों में से जो मुख्य साजिशकर्ता था, उसकी उम्र हाल ही में 20 वर्ष पूरी हो चुकी थी। नियमानुसार उसे अब बाल गृह से हटाकर बिलासपुर की केंद्रीय जेल (सेंट्रल जेल) में स्थानांतरित (शिफ्ट) किए जाने की कानूनी कागजी प्रक्रिया बहुत तेजी से चल रही थी।

शायद इसी बात की भनक उसे लग गई थी और वह जेल जाने से बचना चाहता था। इसके अलावा, जो अन्य तीन आरोपी इसके साथ भागे हैं, वे भी कोई छोटे-मोटे अपराध में नहीं बल्कि हत्या, हत्या के प्रयास और दुष्कर्म (बलात्कार) जैसे जघन्य और संगीन मामलों में यहाँ बंद थे। ऐसे खूंखार अपराधियों के खुलेआम घूमने से शहर में भारी दहशत का माहौल है।

क्राइम ब्रांच और सरकंडा पुलिस की कई टीमें दे रही हैं दबिश; सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही फॉरेंसिक टीम

घटना की भयावहता को देखते हुए सूचना मिलते ही सरकंडा थाना पुलिस की भारी नफरी और जिले के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी देर रात को ही मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने तुरंत शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए सिम्स अस्पताल भेज दिया है, ताकि मौत के सही समय और कारणों का सटीक पता चल सके।

फरार कैदियों को दोबारा सलाखों के पीछे लाने के लिए बिलासपुर पुलिस कप्तान के निर्देश पर क्राइम ब्रांच, सायबर सेल और स्थानीय पुलिस की पांच अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें शहर के रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और आरोपियों के संभावित ठिकानों व गृह ग्रामों में लगातार ताबड़तोड़ दबिश दे रही हैं। इसके साथ ही, बाल गृह के भीतर और बाहर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं और तकनीकी साक्ष्यों (मोबाइल लोकेशन व डंप डेटा) के आधार पर आरोपियों के भागने के रूट को ट्रैक किया जा रहा है।

क्या सुधरने के बजाय अपराधियों की ऐशगाह बन गया है बाल संप्रेक्षण गृह? सुरक्षा पर उठे सवाल

इस सनसनीखेज कांड ने एक बार फिर सरकारी बाल संप्रेक्षण गृहों की खोखली सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जिस सरकारी संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य कानून का उल्लंघन करने वाले नाबालिगों की कड़ी निगरानी करना, उन्हें सुरक्षा देना और समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए उनका पुनर्वास व सुधार करना है, वही संस्थान अब खूनी खेल का अखाड़ा बन चुका है। जनता यह सवाल पूछ रही है कि जब वहां तैनात सुरक्षाकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो ऐसे में सुरक्षा प्रबंधन की क्या उपयोगिता है? रात के समय वहां अतिरिक्त गार्ड क्यों नहीं थे और अधिकारियों की लापरवाही पर क्या एक्शन लिया जाएगा?

कानून अपना काम कर रहा है, जल्द ही सभी आरोपी होंगे पुलिस की गिरफ्त में: सरकंडा पुलिस

इस पूरे घटनाक्रम पर सरकंडा थाना प्रभारी और मामले की जांच कर रहे विवेचना अधिकारी ने बताया कि पुलिस इस केस को बेहद गंभीरता से ले रही है।

पुलिस प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि:

"यह एक बेहद जघन्य और दुस्साहसिक अपराध है। पुलिस ने हत्या और सरकारी कस्टडी से भागने की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। घटना स्थल से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जुटाए गए हैं। पोस्टमॉर्टम की अंतिम रिपोर्ट आते ही मामले में कुछ और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। चारों फरार बाल अपचारियों के हुलिये और तस्वीरें आसपास के जिलों की पुलिस के साथ भी साझा कर दी गई हैं। हमारी टीमें बहुत करीब हैं और जल्द ही सभी आरोपियों को दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा।"

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