रायपुर| छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर से नौकरशाही (ब्यूरोक्रैसी) जोरों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। ताजा मामला प्रदेश के कद्दावर नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा एक ताकतवर आईएएस अधिकारी के खिलाफ की गई आधिकारिक शिकायत से जुड़ा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद के सामने आने के बाद अब राज्य में लाल फीताशाही और प्रशासनिक रवैये को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष पूरी तरह आमने-सामने नजर आ रहे हैं।
बृजमोहन अग्रवाल और आईएएस अधिकारी के बीच का विवाद
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बृजमोहन अग्रवाल की गिनती एक कुशल प्रशासक और मजबूत नेता के रूप में होती है, लेकिन इन दिनों वे वरिष्ठ अधिकारियों के बर्ताव से खासे नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी एक शिकायतभरी चिट्ठी ने रायपुर से लेकर दिल्ली तक की अफसरशाही को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह पूरा विवाद बृजमोहन अग्रवाल और प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव व तेजतर्रार आईएएस अधिकारी अमित कटारिया के बीच उपजा है।
सांसद की शिकायत के अनुसार, फोन पर बातचीत के दौरान अधिकारी द्वारा कथित तौर पर यह कहा गया कि "जो करना है कर लें," और जनप्रतिनिधि की गरिमा के प्रतिकूल भाषा का प्रयोग किया गया। इस गंभीर आचरण से नाराज होकर बृजमोहन अग्रवाल ने इसकी आधिकारिक शिकायत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से कर दी है। सांसद की इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए लोकसभा सचिवालय ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से इस पूरे प्रकरण पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।
कांग्रेस और विपक्ष ने सरकार पर बोला तीखा हमला
लोकसभा सचिवालय द्वारा रिपोर्ट मंगवाए जाने के बाद आगे क्या कार्रवाई होगी, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल बृजमोहन अग्रवाल की नाराजगी और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर शिव डहरिया समेत तमाम विपक्षी नेता खुलकर बृजमोहन अग्रवाल के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसी बहाने प्रदेश की मौजूदा सरकार पर अफसरशाही हावी होने का तीखा हमला बोल रहे हैं।
दूसरी तरफ, उप मुख्यमंत्री अरुण साव विपक्ष के हमलों का पलटवार करते हुए यह सफाई दे रहे हैं कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय में भी अफसरशाही बेलगाम थी, लेकिन साथ ही वे प्रशासनिक अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की बात पूरी गंभीरता से सुनने की सख्त नसीहत देने से भी नहीं चूक रहे हैं।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में अफसरशाही पर छिड़ी नई बहस
छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों के बीच टकराव का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी नकटी के मुद्दे और यातायात व्यवस्था को लेकर बृजमोहन अग्रवाल का गुस्सा अधिकारियों पर फूट चुका है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोकसभा सचिवालय इस मामले में क्या एक्शन लेता है और बृजमोहन अग्रवाल इस पूरी कार्रवाई से कितना संतुष्ट होते हैं। बहरहाल, राजनीतिक गलियारों में एक के बाद एक सामने आ रही इन शिकायतों और चिट्ठियों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।

