सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक दिल दहला देने वाले अंधे कत्ल (ब्लाइंड मर्डर) का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। बीते 12 जून को इलाके में दो बंद बोरियों में बंधी एक अज्ञात लाश मिलने से हड़कंप मच गया था। पुलिस की कड़ाई से की गई तफ्तीश में जो सच सामने आया है, उसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि पिता की रोज-रोज की प्रताड़ना और बेरहमी से तंग आकर उसके सगे 19 वर्षीय इकलौते बेटे ने ही इस खूनी वारदात को अंजाम दिया था। यही नहीं, कत्ल के बाद लाश को ठिकाने लगाने में लड़के के दोस्त और सगे मौसा ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि उसकी अपनी सगी मां ने घर में फैले खून के धब्बों को साफ कर साक्ष्य (सबूत) मिटाने का काम किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए परिवार के सदस्यों सहित चारों आरोपियों को धर दबोचा है और उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
दो बोरों में बंद मिली थी लाश; भाई ने कपड़ों से की शिनाख्त
यह खौफनाक मामला सूरजपुर के रामानुजनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम तिवरागुड़ी का है। 12 जून को ग्रामीणों ने मैदान में दो संदिग्ध बोरों को देखा, जिसमें से तेज बदबू आ रही थी। पुलिस ने जब बोरे को खोला तो उसमें एक अधेड़ व्यक्ति की सड़ी-गली लाश बंधी हुई मिली। शुरुआती 8 दिनों तक शव की शिनाख्त नहीं हो पाने के कारण पुलिस ने नियमानुसार और सम्मानपूर्वक उसका अंतिम संस्कार (कफन-दफन) करवा दिया था।
इसके बाद पुलिस ने सोशल मीडिया और आसपास के जिलों के थानों में गुमशुदगी के रिकॉर्ड खंगाले। आखिरकार, मृतक के छोटे भाई ने कपड़ों और हुलिए के आधार पर शव की पहचान शिवप्रसाद गोंड (45 वर्ष, निवासी चिरमी बचरापोड़ी, थाना बैकुंठपुर) के रूप में की। मृतक की पहचान होते ही पुलिस का शक सीधे उसके परिवार पर गया और जांच की दिशा बदल गई।
बचपन की मारपीट का बदला: मसाला पीसने वाले लोढ़े से किया वार
पुलिस की गिरफ्त में आए 19 वर्षीय मुख्य आरोपी बेटे ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करते हुए एक-एक कर कई चौंकाने वाले राज उगले। आरोपी ने बताया कि उसका पिता शिवप्रसाद बचपन से ही उसके साथ बेहद क्रूरता से मारपीट और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। 10 जून की रात को भी घर में पिता ने विवाद किया। पिता की प्रताड़ना से बुरी तरह आज़िज आ चुके बेटे के सिर पर अचानक खून सवार हो गया। उसने रसोई में रखे मसाला पीसने वाले भारी-भरकम पत्थर के लोढ़े (सिलबट्टे का पत्थर) से सो रहे पिता के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे मौके पर ही तड़प-तड़प कर शिवप्रसाद की मौत हो गई।
बाइक पर लाश ढोकर पहुंचे मौसा के घर, रात के अंधेरे में फेंका शव
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी बेटे ने खौफनाक साजिश रची:
दोस्त की मदद: बेटे ने तुरंत अपने एक पक्के दोस्त को घर बुलाया। दोनों ने मिलकर शिवप्रसाद के शव को मोड़कर दो अलग-अलग बोरियों में ठूंसकर कस दिया।
बाइक से सफर: इसके बाद दोनों आरोपी शव को मोटरसाइकिल के बीच में रखकर चिरमी बचरापोड़ी (बैकुंठपुर) से सीधे तिवरागुड़ी स्थित अपने सगे मौसा के घर ले आए।
मौसा का साथ: 11 जून की पूरी रात लाश को मौसा के घर में छुपाकर रखा गया। इसके बाद अगले दिन यानी 11 जून की देर रात को मौसा की मदद से दोनों युवकों ने शव को गांव के ही एक सुनसान मैदान में फेंक दिया, ताकि किसी को भनक न लगे और पुलिस इसे हादसा या किसी और की दुश्मनी समझे।
ममता का खूनी फर्ज: मां ने गोबर-मिट्टी से लीप दिया मर्डर सीन
पुलिस की तफ्तीश में यह भी साफ हुआ है कि कत्ल की इस वारदात की पूरी जानकारी मृतक शिवप्रसाद की पत्नी को थी। अपने पति की मौत पर आंसू बहाने के बजाय महिला ने हत्यारे बेटे को बचाने का फैसला किया। बेटे के घर से निकलते ही मां ने कमरे और आंगन में फैले खून के गहरे निशानों और साक्ष्यों को पूरी तरह मिटाने के लिए पूरे घर की गोबर और मिट्टी से अच्छी तरह लिपाई-पुताई कर दी, ताकि पुलिस की फॉरेंसिक टीम को वहां से कोई सुराग न मिल सके।
बहरहाल, रामानुजनगर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर महज 11 दिनों के भीतर इस पेचीदा और अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझा लिया है। पुलिस ने साफ किया कि घरेलू हिंसा चाहे कितनी भी गंभीर हो, कानूनन हत्या किसी भी समस्या का अंत नहीं हो सकती। पुलिस अब कोर्ट में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने के लिए आगे की कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी कर रही है।

