रायपुर। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आगामी बाईस और तेईस अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय आधिकारिक प्रवास पर रहेंगी। इस दौरे के दौरान राजधानी रायपुर में युवा प्रबोधन एवं सेवा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया जाएगा, जबकि अपने प्रवास के दूसरे दिन वह बस्तर की विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की साक्षी बनेंगी। राष्ट्रपति के इस महत्वपूर्ण दौरे को लेकर राज्य शासन और स्थानीय प्रशासन द्वारा सभी तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं।
रायपुर में विद्यार्थियों से संवाद और रक्तदाताओं का सम्मान
प्रवास के पहले दिन यानी बाईस अक्टूबर को रायपुर के मुख्य इंडोर स्टेडियम में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रपति स्कूल और कॉलेजों से चुनिंदा आए लगभग एक हजार विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगी। इसके अलावा, राज्य में चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प' अभियान के तहत स्वेच्छिक रूप से रक्तदान करने वाले समर्पित रक्तदाताओं को राष्ट्रपति के कर-कमलों से सम्मानित किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस अनूठी पहल से समाज में स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और युवा वर्ग समाजसेवा के कार्यों के लिए अधिक प्रेरित होगा।
बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' में शिरकत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने प्रवास के दूसरे दिन यानी तेईस अक्टूबर को बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर पहुंचेंगी। यहाँ वे विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के समापन अवसर पर आयोजित होने वाली ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' की रस्म में शामिल होंगी। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, विशिष्ट परंपराओं और प्राचीन लोकतांत्रिक संवाद का प्रतीक 'मुरिया दरबार' आदिवासियों की 'जन-संसद' के रूप में देश-दुनिया में अपनी अनूठी पहचान रखता है। इस दरबार में पारंपरिक रूप से बस्तर अंचल के जनजातीय प्रतिनिधि अपनी क्षेत्रीय समस्याएं, मांगें और सामाजिक मुद्दे बेबाकी से सामने रखते हैं। राष्ट्रपति की इस गरिमामयी उपस्थिति से इस गौरवशाली और ऐतिहासिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है।
लालबाग में विशाल जनसभा को करेंगी संबोधित
जगदलपुर के अपने इस प्रवास के दौरान राष्ट्रपति लालबाग मैदान में आयोजित एक विशाल जनसभा को भी मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगी। इससे पूर्व, वह इसी वर्ष सात फरवरी को बस्तर पंडुम का औपचारिक शुभारंभ करने के लिए जगदलपुर आई थीं। बस्तर पंडुम के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय फलक पर प्रदर्शित किया जाता है। राष्ट्रपति का यह दौरा प्रशासनिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से छत्तीसगढ़ के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

