महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पिछले नौ महीनों में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्री बरामद की गई है। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई में करोड़ों रुपये कीमत का अवैध गांजा और अन्य नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं, साथ ही बड़ी संख्या में तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है।
करोड़ों का मादक पदार्थ जब्त
पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चलाए गए विशेष अभियान के दौरान लगभग दस हजार किलोग्राम गांजा पकड़ा गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत पचास करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस सिलसिले में सैकड़ों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा चुका है, जबकि इस अवैध धंधे में इस्तेमाल होने वाले महंगे वाहनों को भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। इसके अलावा भारी मात्रा में डोडा भी बरामद किया गया है।
अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा
पुलिस ने केवल जब्ती तक सीमित न रहकर इस अवैध कारोबार के पूरे तंत्र की गहराई से छानबीन की है। जांच में यह बात सामने आई है कि यह तस्करी नेटवर्क काफी फैला हुआ था, जिसके तार छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से जुड़े हुए थे। पुलिस ने अपनी कार्रवाई के दौरान विभिन्न राज्यों से संलिप्त आरोपियों को धर दबोचा है।
तस्करी के अनोखे तरीके और गंतव्य
पकड़े गए गांजे को देश के अलग-अलग राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा भेजा जा रहा था। पुलिस की कड़ी निगरानी से बचने के लिए शातिर तस्करों ने परिवहन के बेहद अजीबोगरीब तरीके अपना रखे थे। गांजे की खेप को एंबुलेंस, सब्जियों से भरे ट्रकों, पैकर्स एंड मूवर्स के बक्से और वाहनों में बने गुप्त खानों में छिपाकर ले जाया जाता था। इसके अलावा यात्री बसों, ट्रेनों और अन्य सामान्य साधनों का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।
मुख्य स्रोत और ओडिशा कनेक्शन
पुलिस की गहन पड़ताल में यह बात स्पष्ट हुई कि इस अवैध खेप का मुख्य स्रोत पड़ोसी राज्य ओडिशा था। ओडिशा के विभिन्न जिलों से इस मादक पदार्थ की आपूर्ति की जा रही थी, जिसकी पहचान करके पुलिस ने तस्करों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है।

