बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अंबिकापुर स्थित राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने के सामान्य सभा के निर्णय को पूरी तरह से मनमाना करार देते हुए रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन और संबंधित चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि 20 जुलाई 2022 को जारी मूल भर्ती विज्ञापन और उसके बाद निकाले गए संशोधित विज्ञापन के आधार पर रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को उसी चरण से पुनः आरंभ किया जाए और आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन महीनों के भीतर पूरी चयन प्रक्रिया को संपन्न कराया जाए।
भर्ती रद्द करने के प्रशासनिक फैसले को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
इस मामले में पीड़ित अभ्यर्थी आदित्य सैनी, युवराज लिंगम, टिकेश्वर राम, सुभद्रा पैंकरा, खेल साय, गौरव गोंड, दिलेश्वर राम, सोनम सिदार, प्रमोद जायसवाल और वृंदावती ने निरस्तीकरण के आदेश को याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव ने अदालत के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि भर्ती विज्ञापन प्रकाशित होने के पश्चात चयन की कार्यवाही काफी आगे बढ़ चुकी थी। अभ्यर्थियों की मेरिट सूची तैयार कर ली गई थी और अभ्यर्थियों को 23 अगस्त 2023 को दस्तावेजों के सत्यापन हेतु आमंत्रित भी कर लिया गया था। इसके बावजूद 23 अप्रैल 2025 को आयोजित सामान्य सभा की बैठक में पूरी प्रक्रिया को अचानक निरस्त कर नए सिरे से भर्ती कराने का अनुचित निर्णय ले लिया गया।
हजारों आवेदनों और प्रक्रियात्मक देरी के तर्कों को अदालत ने माना अमान्य
अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के पक्ष से बताया गया कि प्रशासन द्वारा भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के पीछे आवेदनों की अत्यधिक संख्या और प्रक्रिया में लगने वाले समय का हवाला दिया गया था। महाविद्यालय के डीन द्वारा 19 जून 2025 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को प्रेषित पत्र के अनुसार, विज्ञापित कुल 448 रिक्त पदों के सापेक्ष कुल 55,335 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें तृतीय श्रेणी के 63 पदों के लिए 10,374 तथा चतुर्थ श्रेणी के 385 पदों के लिए 44,961 आवेदन प्राप्त हुए थे। उच्च न्यायालय ने केवल आवेदनों की अधिक संख्या को आधार बनाकर पूरी हो चुकी मेरिट प्रक्रिया को निरस्त करने के रवैये को अनुचित माना और अभ्यर्थियों के हित में पुरानी भर्ती प्रक्रिया को ही बहाल करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

