कोयला लेवी घोटाले में चुनावी खर्च का दावा, 104 करोड़ की रकम को लेकर EOW का खुलासा

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने सोमवार को स्थानीय अदालत में बहुचर्चित कोल लेवी (कोयला लेवी) घोटाला मामले में अपना छठवां पूरक आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। इस पूरक चार्जशीट में कई बेहद चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी EOW ने अपनी रिपोर्ट में यह बड़ा दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से अवैध रूप से वसूली गई कुल 104 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य दफ्तर ‘राजीव भवन’ तक पहुँचाई गई थी। जांच के अनुसार, उस दौरान छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष के पद पर रहे रामगोपाल अग्रवाल तक इस अवैध वसूली का हिस्सा पहुँचाया गया था।

सूर्यकांत तिवारी को बताया गया पूरे घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड

EOW द्वारा कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की ई-परमिट प्रणाली (ऑनलाइन सिस्टम) में जानबूझकर बदलाव किए गए थे। इसके तहत जिला खनिज अधिकारी (DMO) का मैनुअल अनुमोदन (मैन्यूअल एप्रूवल) अनिवार्य कर दिया गया था। इस तकनीकी बदलाव की वजह से बिना वैध डीओ (DO) जारी हुए कोयले की लोडिंग बंद हो गई और परिवहन पर पूरी तरह रोक लग गई। इसी बात की आड़ लेकर 25 रुपये प्रति टन की तय दर से अवैध कोयला लेवी की जबरन वसूली की गई। इस पूरे सिंडिकेट और मामले का मुख्य मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी को बताया गया है। इसके साथ ही, जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि इस पूरी उगाही के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) और कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया था।

अवैध तरीके से जुटाई गई रकम को शेल कंपनियों और फर्जी निवेश में लगाया गया

अवैध रूप से वसूली गई अकूत रकम को छिपाने और उसे सफेद करने के लिए कई लोगों की मदद ली गई। इनमें मुख्य रूप से आईएएस अधिकारी रानू साहू के भाई पीयूष साहू, सौम्या चौरसिया के संबंधी अनुराग चौरसिया, कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल और जोगेंदर सिंह का नाम शामिल है। इन सभी के जरिए फर्जी लोन, राइस मिलों और कई शेल (मुखौटा) कंपनियों के माध्यम से 10 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध बैंक एंट्री कराई गईं, ताकि अवैध धन का सुराग आसानी से न मिल सके।

सोशल मीडिया चैट और हस्तलिखित डायरी से खुले घोटाले के कई बड़े राज

इस पूरे भ्रष्टाचार के काले कारोबार का पर्दाफाश करने में सोशल मीडिया व्हाट्सएप और बरामद हुई डायरी ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। EOW ने अपनी जांच में हस्तलिखित डायरी, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच मैसेंजर ऐप व्हाट्सएप पर हुई गुप्त बातचीत को पुख्ता साक्ष्य (सबूत) बनाया है। जांच के दौरान हाथ लगी इस डायरी में ‘डी’, ‘RP’, ‘JP’, ‘चंद्रा’, ‘भगत’, ‘C PARTY’ और ‘MU’ जैसे कई संदेहास्पद कोडवर्ड्स भी मिले हैं, जिनकी गहराई से जांच की जा रही है।

Latest news

Related news