Maithili Sharan Gupta : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 3 अगस्त को जयंती पर उन्हें नमन किया है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुप्त जी का काव्य जन-जागरण और नैतिक चेतना से ओतप्रोत था. राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत परिमार्जित खड़ी बोली की उनकी रचनाओं ने बड़े वर्ग पर प्रभाव डाला. देशवासियों के हृदय में देश-प्रेम की अलख जगाने में उनकी रचनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी रचनाओं के प्रभाव को देखते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि दी थी. उनकी रचनाएं रामायण एवं महाभारत से प्रभावित थीं. गुप्त जी को उनके कालजयी साहित्य के लिए पद्मभूषण सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि गुप्त जी की रचनाएं भारतीय सहित्य की अमूल्य धरोहर हैं, जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी.
राष्ट्रकवि का जन्म झांसी में हुआ था ….
राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को झांसी से करीब 35 किलोमीटर दूर चंरगांव कस्बे में हुआ था. उनके पिता सेठ रामचऱण एक जमींदार थे और मां कौशल्या बाई एक गृहणी. 12 वर्ष की उम्र से लेखन में लगे मैथिली शरण गुप्त की प्रतीभा को आचार्य महावीर प्रसाद दिवेदी ने पहचाना और उन्होने उन्हें अपना शिष्य बन लिया.
मैथिली शरण की पहली रचना ‘रंग में भंग’ नाम का काव्य संग्रह थी. साल 1914 में मैथिली शरण ने ‘भारत भारती’ नाम से एक कविता लिखी जिसे सभी ने खूब पसंद किया.
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दी थी राष्ट्रकवि की उपाधि
लेखन में उर्जा और ओज को देखते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मैथिली शरण को राष्ट्रकवि का उपाधी से पुकारा. राष्ट्र कवि ने साल 1931 में साकेत के नाम से कालजयी रचना लिखी , जो आज भी साहित्य जगत के लिए अराध्य है. इस रचना ने मैथिली शरण गुप्त को प्रसिद्धि दिलाई. महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनकी रचनाएं देखकर उन्हें राष्ट्रकवि की संज्ञा दी. गुजरते समय के साथ उनके लगातार लेखन ने उन्हें देश के बड़े कवियों के साथ-साथ महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से जोड़ा और वो सभी के पंसदीदा कवि बन गए थे.

