कांकेर की 16 युवतियां झारखंड में बंधक: परिजनों ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर लगाई सुरक्षित वापसी की गुहार
कांकेर: छत्तीसगढ़ की युवतियों को रोजगार का झांसा देकर झारखंड ले जाने और वहां उन्हें बंधक बनाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। खबर फैलते ही पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित कांकेर जिले के 16 परिवारों के सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। परिजनों की आंखों में आंसू और चेहरों पर अपनी बेटियों के खो जाने का डर साफ दिखाई दे रहा था।
कलेक्टर से मदद की अपील
कलेक्ट्रेट पहुंचे राजकुमार दर्रो, माधव नेताम और बाबूलाल मंडावी सहित अन्य ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपते हुए बताया कि उनकी बेटियां काम की तलाश में झारखंड गई थीं, लेकिन अब उन्हें वहां से वापस नहीं आने दिया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें झांसा देकर दूसरे राज्य ले जाया गया और अब वहां उन्हें कैद कर रखा गया है। उन्होंने मांग की कि:
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मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया जाए।
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झारखंड प्रशासन से संपर्क कर सभी युवतियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जाए।
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कई दिनों से संपर्क न होने के कारण परिवारों में भारी तनाव और भय व्याप्त है।
एक संदेश से हुआ बड़ा खुलासा
इस पूरे गिरोह का राज तब खुला जब दुर्गूकोंदल क्षेत्र की एक युवती ने गुप्त रूप से अपने गांव के एक युवक को मोबाइल पर संदेश भेजकर मदद मांगी। उसने बताया कि उन्हें नौकरी के नाम पर बुलाया गया था, लेकिन अब वहां जबरन काम कराया जा रहा है और घर लौटने पर पाबंदी लगा दी गई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी कुछ वीडियो और संदेश वायरल हुए, जिसमें युवतियां मदद मांगती नजर आ रही हैं।
मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क का अंदेशा
सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता ललित नरेटी ने इस मुद्दे को उठाते हुए दावा किया कि केवल कांकेर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों की करीब 35 युवतियां झारखंड में फंसी हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, इन युवतियों को झारखंड के गढ़वा क्षेत्र के कुछ निजी संस्थानों में रखा गया है।
आशंका जताई जा रही है कि दलाल आदिवासी क्षेत्रों की गरीब युवतियों को ज्यादा वेतन का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और फिर उनका शोषण करते हैं। यह एक बड़े संगठित मानव तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
पलायन और बेरोजगारी मुख्य वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर संभाग में पर्याप्त रोजगार न होने के कारण युवा मजबूरी में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। दलाल इसी मजबूरी का फायदा उठाते हैं और अवैध प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से युवाओं को प्रताड़ित करते हैं। सरकार से मांग की गई है कि ऐसी एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की तैयारी
मामला बढ़ता देख कांकेर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि युवतियों से संपर्क साधने की कोशिश जारी है। जैसे ही उनकी लोकेशन की पुष्टि होती है, एक विशेष रेस्क्यू टीम झारखंड के लिए रवाना की जाएगी। पुलिस और श्रम विभाग को भी इस मामले में अलर्ट कर दिया गया है। फिलहाल, कई परिवार अपनी बेटियों की सुरक्षित घर वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

