570 crore coal levy case रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित ₹570 करोड़ के कथित कोल लेवी घोटाले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई एक बार फिर तेज हो गई है. आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को रायपुर की विशेष अदालत में करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया. आरोपपत्र में 12 आरोपियों को नामजद किया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि कथित कोल लेवी वसूली से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों, संपत्ति खरीद और अन्य माध्यमों में किया गया.
इस मामले में अब कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और पूर्व खनिज संचालक आईएएस जयप्रकाश मौर्य समेत कई लोगों के नाम जांच के दायरे में हैं. आरोपपत्र में विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, पीयूष कुमार साहू, जोगेंद्र सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा के नाम भी शामिल बताए गए हैं.
570 crore coal levy case:5 अक्टूबर को कोर्ट में क्या हुआ?
कोल लेवी मामले में रायपुर की विशेष अदालत ने नौ आरोपियों को पेश होने के लिए समन जारी किया था. इनमें देवेंद्र यादव, चंद्रदेव राय, रामगोपाल अग्रवाल और आईएएस जयप्रकाश मौर्य समेत अन्य आरोपी शामिल हैं. EOW की ओर से जांच के आधार पर अंतिम चरण का आरोपपत्र पेश किए जाने के बाद अब इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है.
EOW का दावा है कि कथित सिंडिकेट के जरिए जुटाई गई रकम में से करीब ₹65 करोड़ नेताओं और ₹36 करोड़ से ज्यादा अधिकारियों तक पहुंचाए गए. एजेंसी ने जांच के दौरान बड़ी मात्रा में संपत्तियों और लेनदेन की जानकारी सामने आने का भी दावा किया है.
हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसियों के दावे हैं. अदालत में आरोप साबित होना अभी बाकी है.
क्या है पूरा कोल लेवी घोटाला?
इस मामले की जड़ वर्ष 2020 में जारी उस व्यवस्था में बताई जाती है, जिसमें कोयला परिवहन से जुड़े ऑनलाइन परमिट सिस्टम में बदलाव किया गया था. ED के अनुसार, 15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद कोयले के परिवहन के लिए मैनुअल NOC की व्यवस्था प्रभावी हुई. जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी व्यवस्था का कथित रूप से दुरुपयोग कर कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से अवैध वसूली का नेटवर्क तैयार किया गया.
ED के मुताबिक कथित सिंडिकेट कोयले के परिवहन पर ₹25 प्रति टन की अवैध लेवी वसूलता था. एजेंसी ने अपनी जांच में जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच लगभग ₹540 करोड़ की अपराध से अर्जित रकम (Proceeds of Crime) का अनुमान लगाया था.
यहीं से ₹540 करोड़ और ₹570 करोड़ के आंकड़ों को लेकर अंतर भी सामने आता है. ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में करीब ₹540 करोड़ की अवैध वसूली का आंकड़ा सामने आया है, जबकि छत्तीसगढ़ EOW/ACB के मामले में कथित घोटाले की रकम करीब ₹570 करोड़ बताई जा रही है.
सूर्यकांत तिवारी पर क्या आरोप हैं?
जांच एजेंसियों के अनुसार कारोबारी सूर्यकांत तिवारी कथित कोल लेवी नेटवर्क का प्रमुख संचालक था. ED ने आरोप लगाया था कि तिवारी और उसके सहयोगियों ने अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक संपर्कों के जरिए कथित वसूली का नेटवर्क बनाया.
ED की 2022 की जांच के मुताबिक कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से रकम वसूलने के लिए एक समानांतर व्यवस्था बनाई गई थी. एजेंसी का आरोप था कि अवैध तरीके से जुटाए गए पैसे का एक हिस्सा अधिकारियों और राजनीतिक प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने और अन्य निवेश में किया गया.
EOW की ताजा कार्रवाई में भी जांच एजेंसी ने कथित तौर पर इसी नेटवर्क से नेताओं और अधिकारियों तक रकम पहुंचने की बात कही है.
देवेंद्र यादव और दूसरे नेताओं पर क्या आरोप हैं?
ताजा आरोपपत्र से जुड़े मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने आरोप लगाया है कि कोल लेवी से जुटाई गई कथित रकम का कुछ हिस्सा राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी खर्च में इस्तेमाल हुआ.
एजेंसी के आरोपों में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव का नाम भी शामिल है. EOW के अनुसार कथित तौर पर उन्हें कई किस्तों में रकम दी गई और उसका कुछ हिस्सा चुनावी गतिविधियों में खर्च किए जाने का आरोप है. इसी तरह पूर्व विधायक चंद्रदेव राय के बारे में भी कथित तौर पर रकम लेने और उसके एक हिस्से को चुनाव तथा आभूषण खरीद में खर्च करने का दावा किया गया है.
ED की जांच में कितनी कार्रवाई हुई?
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में कई स्तर पर कार्रवाई की है. ED के मुताबिक फरवरी 2025 तक उसने आरोपियों से जुड़ी ₹49.73 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं. एजेंसी ने इससे पहले करीब ₹55.37 करोड़ की अन्य संपत्तियां भी अटैच किए जाने की जानकारी दी थी.
ED का कहना था कि अब तक कुल मिलाकर लगभग ₹270 करोड़ की संपत्तियां अटैच की जा चुकी थीं. साथ ही एजेंसी ने इस मामले में 11 लोगों की गिरफ्तारी और 26 आरोपियों के खिलाफ तीन अभियोजन शिकायतें दाखिल किए जाने की जानकारी दी थी.
इससे साफ है कि मामला केवल कथित नकद वसूली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच का दायरा संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग और कथित राजनीतिक-अधिकारी नेटवर्क तक फैल चुका है.
सुप्रीम कोर्ट से आरोपियों को राहत भी मिली
इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम जनवरी 2026 में सामने आया. सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी 2026 को कोल स्कैम से जुड़े कई आरोपियों को नियमित जमानत दी.
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कई आरोपी लंबे समय तक हिरासत में रह चुके थे, जांच में पूरक आरोपपत्र दाखिल होते रहे थे और मुकदमे में सैकड़ों गवाह होने के कारण सुनवाई पूरी होने में काफी समय लग सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अंतरिम जमानत के दौरान आरोपियों की ओर से उसके दुरुपयोग का कोई मामला सामने नहीं आया.
चार्जशीट के बाद अब अगली सुनवाई पर नजर
EOW की ताजा चार्जशीट के बाद मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी अदालत में आरोपों पर आगे की सुनवाई होगी. जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और कथित रकम के वितरण से जुड़े सबूतों की न्यायिक जांच होगी.
मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि कथित ₹570 करोड़ की पूरी रकम का प्रवाह किस तरह हुआ और इसमें किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी. ED और EOW की जांच में रकम के आंकड़े और जांच का दायरा अलग-अलग होने के बावजूद दोनों एजेंसियों की जांच का केंद्रीय बिंदु कथित कोयला परिवहन से अवैध लेवी वसूलने और उस रकम को आगे पहुंचाने का नेटवर्क है.
राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
कोल लेवी केस केवल आर्थिक अपराध का मामला नहीं है. इसमें तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था, खनन विभाग की कार्यप्रणाली, कारोबारियों से कथित वसूली और राजनीतिक स्तर पर कथित धन के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप जुड़े हैं.
इसी वजह से यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है. कांग्रेस नेताओं के नाम सामने आने के कारण विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी होते रहे हैं.
केस की टाइमलाइन
15 जुलाई 2020: कोयला परिवहन से जुड़ी परमिट/NOC व्यवस्था में बदलाव हुआ, जिसे ED ने कथित अवैध वसूली के नेटवर्क की शुरुआत से जोड़ा.
2020-2022: ED के अनुसार इस अवधि में कथित तौर पर करीब ₹540 करोड़ की अवैध वसूली हुई.
2022: ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की और कई स्थानों पर छापेमारी व गिरफ्तारियां कीं.
2024: ACB/EOW ने कोल स्कैम से जुड़ी FIR दर्ज की.
2025: ED ने संपत्तियों की कुर्की और जांच का विस्तार किया. एजेंसी ने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की.
28 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने कई आरोपियों को नियमित जमानत दी, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ.
5 अक्टूबर 2026: EOW ने करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया और 12 आरोपियों के नाम सामने आए.

