वैश्विक तनाव का असर बेअसर, देश में FMCG उत्पादों की मांग बनी रही मजबूत

मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण कच्चे माल की उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है, इसके बावजूद भारत के तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता उत्पाद (FMCG) क्षेत्र में मांग का रुख बेहद मजबूत बना हुआ है। वित्तीय विश्लेषक फर्म आनंद राठी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, एफएमसीजी कंपनियों ने कच्चे माल की महंगाई से अपने प्रॉफिट मार्जिन (लाभप्रदता) को सुरक्षित रखने के लिए बाजार में चालाकी से कदम उठाए हैं। कंपनियों ने विभिन्न श्रेणियों के उत्पादों की कीमतों में 3 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इस मूल्य वृद्धि के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं की खरीदारी की क्षमता और इच्छा पर कोई नकारात्मक असर नहीं देखा गया है, जो इस सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है।

चौथी तिमाही में राजस्व में 11 फीसदी का शानदार उछाल

आनंद राठी की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के दौरान देश के उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र ने राजस्व के मोर्चे पर बेहद शानदार प्रदर्शन किया है। बाजार में मांग के लगातार बढ़ते ग्राफ, चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में की गई वृद्धि और प्रीमियम (महंगे एवं उच्च गुणवत्ता वाले) प्रोडक्ट्स पर कंपनियों के लगातार फोकस ने इस ग्रोथ को बड़ा सहारा दिया है। आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में इस सेक्टर की राजस्व वृद्धि (रेवेन्यू ग्रोथ) 11 फीसदी दर्ज की गई, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यह औसत वृद्धि दर 8 फीसदी रही थी। हालांकि, अलग-अलग श्रेणियों में मौसम की अनिश्चितता और विशेष चुनौतियों के कारण कंपनियों की विकास दर में थोड़ा अंतर जरूर देखा गया, लेकिन अधिकांश कंपनियों ने अपने मुख्य कारोबार (टॉप-लाइन) में सकारात्मक विस्तार दर्ज किया है।

बिक्री की मात्रा में सुधार और जीएसटी कटौती बने विकास के इंजन

एफएमसीजी क्षेत्र में आई इस तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं, जिनमें सबसे प्रमुख बाजार में उत्पादों की बिक्री मात्रा (सेल वॉल्यूम) में आया उल्लेखनीय सुधार है। इसके साथ ही सरकार द्वारा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में की गई कटौती ने भी इस सेक्टर के लिए बूस्टर डोज का काम किया है। कंपनियों द्वारा अपने वितरण नेटवर्क (डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क) का सुदूर ग्रामीण इलाकों तक विस्तार करने और बाजार में ग्राहकों की पसंद के हिसाब से लगातार किए जा रहे नए उत्पाद नवाचारों (प्रोडक्ट इनोवेशन) ने इस गति को और तेज कर दिया है। इन सभी पहलों ने मिलकर बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता को आसान बनाया है, जिससे नए प्रॉडक्ट्स की खपत तेजी से बढ़ी है।

अल नीनो का खतरा और कम मानसून से ग्रामीण बाजार पर संकट के बादल

स्वस्थ मांग और मुनाफे के बीच आनंद राठी ने निकट भविष्य के लिए मौसम संबंधी बड़े जोखिमों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है, जो इस सेक्टर की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आगामी मानसून के सीजन में प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' की स्थिति सक्रिय होने की पूरी आशंका बनी हुई है। इसी के मद्देनजर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 में सामान्य से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके तहत मानसून दीर्घकालिक औसत से 10 फीसदी तक कम रह सकता है। यदि बारिश कमजोर रहती है, तो इसका सीधा और बुरा असर ग्रामीण भारत की खेती, किसानों की आय और उनकी क्रय शक्ति पर पड़ेगा, जो देश में उपभोक्ता उत्पादों की कुल खपत और मांग के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

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