कमाई बढ़ी, लेकिन घाटा भी बढ़ा; FY26 में PhonePe के वित्तीय नतीजे चौंकाने वाले

नई दिल्ली: देश की प्रमुख डिजिटल पेमेंट्स प्लेटफॉर्म फोनपे (PhonePe) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में जमा कराई गई फाइलिंग के अनुसार, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹7,920 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹7,115 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस 62 प्रतिशत बढ़कर ₹2,792 करोड़ पर पहुंच गया। देश में यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन में 45 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इस कंपनी के घाटे में यह बढ़ोतरी कई परिचालन और नीतिगत बदलावों के कारण दर्ज की गई है।

राजस्व वृद्धि दर में नरमी और शुद्ध घाटा बढ़ने के प्रमुख कारण

कंपनी के राजस्व की धीमी गति और शुद्ध घाटे में वृद्धि के पीछे कई बड़े कारण रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष के दौरान क्रेडिट कार्ड के जरिए रेंट पेमेंट पर रोक लगाने, सरकार द्वारा रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध लागू करने और यूपीआई भुगतान के लिए सरकारी सब्सिडी न मिलने जैसे फैसलों का कंपनी के परिचालन पर सीधा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मलाइज्ड ऑपरेशनल आधार पर देखा जाए तो वित्त वर्ष 2026 में फोनपे का शुद्ध घाटा ₹1,377 करोड़ रहा है।

बाजार की परिस्थितियों के कारण फिलहाल टल चुका है आईपीओ

कंपनी द्वारा बाजार में लाया जाने वाला बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार के माहौल को देखते हुए कंपनी ने यह निर्णय लिया है, हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक लिस्टिंग की प्रक्रिया पुनः प्रारंभ की जा सकती है। फोनपे ने जनवरी 2026 में बाजार नियामक सेबी के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) जमा किया था, जिसके अनुसार यह सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) पर आधारित होगा। इसमें 5.06 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए रखे जाएंगे और कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा।

वॉलमार्ट की मुख्य हिस्सेदारी और मौजूदा निवेशकों की स्थिति

फोनपे में वॉलमार्ट इंटरनेशनल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी डब्ल्यूएम डिजिटल कॉमर्स होल्डिंग्स की 71.77 प्रतिशत की बहुलांश हिस्सेदारी है। इसके अलावा जनरल अटलांटिक सिंगापुर, हेडस्टैंड, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल फाइनेंस जैसे प्रमुख वैश्विक निवेशक भी कंपनी में भागीदार हैं। ऑफर-फॉर-सेल के माध्यम से टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां अपनी आंशिक अथवा पूर्ण हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल सकती हैं। कंपनी में रिबिट कैपिटल, टीवीएस कैपिटल और कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी का भी निवेश लगा हुआ है।

गोपनीय रूट के जरिए सेबी से आईपीओ ड्राफ्ट को मिली थी मंजूरी

सितंबर 2025 में फोनपे ने गोपनीय (कॉन्फिडेंशियल) तरीके से सेबी के समक्ष लगभग 12,000 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट जमा कराया था। गोपनीय रूट की व्यवस्था से कंपनियों को अंतिम निर्णय होने तक अपनी रणनीतिक जानकारियों की गोपनीयता बनाए रखने का अवसर मिलता है। बाजार नियामक सेबी ने 20 जनवरी 2026 को इस ड्राफ्ट को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी थी, जिसके बाद अब परिस्थितियां अनुकूल होने पर कंपनी अपनी लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

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