नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की आगामी बैठक से पहले बाजार में ब्याज दरों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। बढ़ती महंगाई पर लगाम कसने के प्रयासों के तहत, कई अर्थशास्त्रियों ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है, जिससे यह दर 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो सकती है। एक सर्वेक्षण में शामिल 10 में से 8 अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर की एमपीसी बैठक में इस बढ़ोतरी की संभावना व्यक्त की है। छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होनी है, जिसके फैसले की घोषणा 7 अक्टूबर को की जाएगी। यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद पहली होगी, जबकि आरबीआई ने पिछली चार बैठकों में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर बनाए रखा था। गौरतलब है कि 2025 में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी। रेपो रेट में संभावित वृद्धि का मुख्य कारण बढ़ती खुदरा और थोक महंगाई है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई थी, जो आरबीआई के 4 फीसदी के मध्यम अवधि लक्ष्य से काफी ऊपर है। इसी अवधि में थोक महंगाई भी 9.92 फीसदी तक पहुंच गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव भी भविष्य में महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंता बढ़ा रहे हैं। महंगाई पर नियंत्रण के साथ-साथ आरबीआई के सामने आर्थिक विकास को बनाए रखने की चुनौती भी है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि को देखते हुए, केंद्रीय बैंक को महंगाई और विकास के बीच संतुलन साधना होगा। आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.7 फीसदी रखा है। यदि रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर रेपो-लिंक्ड होम लोन और अन्य कर्जों की मासिक किस्तों (ईएमआई) पर पड़ सकता है। हालांकि, यह बढ़ोतरी अभी अर्थशास्त्रियों का अनुमान मात्र है, अंतिम फैसला एमपीसी की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

