देश के सबसे व्यस्त इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर सुरक्षा और पैसेंजर ट्रांसफर प्रोटोकॉल में एक गंभीर लापरवाही का मामला उजागर हुआ है। अमृतसर से दिल्ली पहुँचे तीन इतालवी नागरिक बिना अनिवार्य आव्रजन (इमिग्रेशन) प्रक्रिया पूर्ण किए ही म्यूनिख जाने वाली अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में सवार होकर विदेश निकल गए। इस अति-संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सरकार ने इसे 'हब-एंड-स्पोक' प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन मानते हुए एयरलाइन से 7 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया है।
दिल्ली हवाई अड्डे पर कैसे हुई यह गंभीर सुरक्षा चूक?
यह पूरा वाकया 4 सितंबर 2026 की देर रात का है। तीन इतालवी नागरिक—सुरजीत सिंह, बलविंदर कौर और गुरदेव सिंह—अमृतसर से एयर इंडिया की घरेलू उड़ान AI-1115 के माध्यम से रात लगभग 12:50 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे थे। इन यात्रियों के पास केवल घरेलू यात्रा हेतु 'D' इंडिकेटर वाले बोर्डिंग पास थे और उन्हें लुफ्थांसा की उड़ान LH-763 से म्यूनिख के लिए रवाना होना था, जो रात 1:45 बजे उड़ी।
मानक नियमों के अनुसार, घरेलू उड़ान से आए यात्रियों को गेट नंबर 39 से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्र में जाना था और अनिवार्य इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी थी। परंतु, यात्रियों को सीधे 'इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल' (I-to-I) ट्रांसफर एरिया में भेज दिया गया, जो केवल उन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए आरक्षित होता है जिनकी इमिग्रेशन जांच पहले ही हो चुकी होती है। इसके परिणामस्वरूप तीनों नागरिक बिना किसी आव्रजन जांच के लुफ्थांसा के विमान में सवार होकर रवाना हो गए।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया से पूछे तीखे सवाल
मंत्रालय द्वारा शनिवार (12 सितंबर) को जारी कारण बताओ नोटिस में एयर इंडिया के यात्री प्रबंधन और चेकिंग तंत्र पर नौ प्रमुख सवाल खड़े किए गए हैं:
'D' इंडिकेटर वाले घरेलू यात्रियों को 'I-to-I' ट्रांसफर क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति कैसे मिली?
हब एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को पृथक रखने के नियम का कड़ाई से पालन क्यों नहीं किया गया?
यात्रियों को निकास द्वार से निकालकर इमिग्रेशन काउंटर पर भेजने के बजाय सीधे I-to-I रूट पर क्यों भेजा गया?
अमृतसर (स्पोक एयरपोर्ट) में ही लुफ्थांसा की आगे की अंतरराष्ट्रीय उड़ान का बोर्डिंग पास क्यों जारी किया गया, जबकि नियमों में इसका प्रावधान नहीं है?
अमृतसर और दिल्ली में इन यात्रियों को गाइड करने वाले एयर इंडिया और एआई-सैट्स (AI-SATS) के ग्राउंड स्टाफ की क्या भूमिका रही?
बिना इमिग्रेशन के यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में चढ़ने से रोकने के लिए 24 घंटे तैनात रहने वाली पर्यवेक्षी टीम घटना के समय क्या कर रही थी?
दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का समय पर आवश्यक मिलान (रिकॉन्सिलेशन) क्यों नहीं हुआ?
क्या इमिग्रेशन अधिकारियों को पैसेंजर मैनिफेस्ट, जनरल डिक्लेरेशन और API/PNR डेटा निर्धारित समय पर उपलब्ध कराया गया था?
प्रस्थान से पूर्व स्वचालित जांच प्रणालियों में यह चूक क्यों नहीं पकड़ में आई और बाद में केवल मैन्युअल मिलान के दौरान ही इसका पता क्यों चला?
सुरक्षा चूक उजागर होने के बाद केंद्र सरकार का कड़ा रुख
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मानकों और आव्रजन नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। गृह मंत्रालय ने इस चूक को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि एयर इंडिया को नोटिस प्राप्ति की तिथि से 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देना अनिवार्य है। यदि एयरलाइन निर्धारित समय में संतोषजनक उत्तर देने में विफल रहती है, तो सरकार उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा प्रशासनिक व नियामक कार्रवाई शुरू कर सकती है।
यह प्रकरण भारतीय विमानन क्षेत्र में ग्राउंड हैंडलिंग और पैसेंजर ट्रांसफर प्रोटोकॉल की बड़ी खामियों को उजागर करता है। तीन विदेशी नागरिकों का बिना इमिग्रेशन देश से बाहर निकल जाना न केवल सुरक्षा विफलता को दर्शाता है, बल्कि जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है। एयर इंडिया के आगामी जवाब और सरकार के कड़े रुख से ही भविष्य में ऐसे सुरक्षा जोखिमों को रोकने के लिए ठोस नीतियाँ तय होंगी।

