नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की अमेरिकी उप सहायक सचिव, बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने संकेत दिए हैं कि दोनों महाशक्तियां इस ऐतिहासिक डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुँच चुकी हैं। एक हालिया कार्यक्रम में उन्होंने साझा किया कि फरवरी 2026 में इस डील पर मुहर लगाने का जो लक्ष्य तय किया गया था, दोनों देश अब उसके बेहद नजदीक हैं।
विशाल बाजार और 'मिशन 500' का लक्ष्य
इस रणनीतिक समझौते के लागू होने से अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत के 1.4 अरब उपभोक्ताओं का एक विशाल बाजार खुल जाएगा। यह डील किसी एक देश के फायदे के लिए नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच समानता और आपसी लाभ के सिद्धांत पर आधारित है।
फिलहाल अमेरिकी प्रशासन 'मिशन 500' को अमलीजामा पहनाने में जुटा है। इसके तहत साल 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा करने के लिए दोनों ही पक्ष पूरी गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं।
व्यापारिक आंकड़ों में ऐतिहासिक उछाल
अगर हालिया आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2025 दोनों देशों के व्यापारिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस अवधि में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 149 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुँचा, जो कि साल 2024 की तुलना में 20 मिलियन डॉलर से भी अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। विशेष रूप से, भारत को किए जाने वाले अमेरिकी निर्यात में 9.8 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई है।
अमेरिकी बाजार में भारतीय निवेश की धमक
आर्थिक संबंधों की यह मजबूती सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश के मोर्चे पर भी भारतीय कंपनियां अमेरिका में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं। 'सिलेक्ट यूएसए' इवेंट के दौरान भारतीय फर्मों की ओर से अमेरिका में 20 अरब डॉलर के नए निवेश की संभावनाएं जताई गईं, जिसमें से 1.1 अरब डॉलर का निवेश तत्काल प्रभाव से जमीन पर उतारा जा चुका है।
नई दिल्ली में हाई-लेवल बैठक और भविष्य का रोडमैप
इसी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में उस अंतरिम समझौते की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसकी रूपरेखा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तैयार की थी। इस दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर सहित अमेरिका का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा।
अमेरिकी दूतावास ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य फोकस एक पारदर्शी और निष्पक्ष व्यापार नीति तैयार करना है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को बेहतर अवसर मिल सकें। वाणिज्य भवन में आयोजित इस बैठक में अंतरिम रूपरेखा के साथ-साथ एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी गहन मंथन हुआ। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी दल का स्वागत करते हुए दोनों देशों के आर्थिक भविष्य को लेकर गहरी उम्मीदें जताई हैं।

