सोने-चांदी पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी, शेयर और कमोडिटी मार्केट पर असर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने और कीमती धातुओं के बेलगाम आयात पर नियंत्रण कसने के उद्देश्य से सोना-चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने इन बहुमूल्य धातुओं पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी वृद्धि करते हुए इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के तहत मूल सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर को 5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। सरकार के इस सख्त कदम का असर घरेलू बाजार पर तुरंत देखने को मिला है, जहां एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल दर्ज किया गया है।

घरेलू बाजार में कीमतों का ऐतिहासिक उछाल और निवेशकों की हलचल

आयात शुल्क में वृद्धि की खबर फैलते ही भारतीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों ने आसमान छूना शुरू कर दिया है। एमसीएक्स पर सोने का वायदा भाव करीब 6 प्रतिशत की बढ़त के साथ एक लाख बासठ हजार रुपए के पार पहुंच गया है, वहीं चांदी में भी 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई जो लगभग दो लाख छियानवे हजार रुपए के स्तर पर कारोबार कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें प्रति दस ग्राम 1.70 लाख रुपए और चांदी प्रति किलोग्राम 3 लाख रुपए के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती हैं, जिससे आम खरीदारों की जेब पर सीधा बोझ बढ़ना तय है।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और अमेरिकी मुद्रास्फीति का प्रभाव

घरेलू बाजार में तेजी के विपरीत वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पश्चिम एशिया के तनाव और अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को कम कर दिया है, जिसके चलते वहां स्पॉट गोल्ड की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। भारतीय बाजार में छाई यह तेजी पूरी तरह से सरकार द्वारा ड्यूटी बढ़ाए जाने का परिणाम है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव को भी बेअसर कर रही है और घरेलू निवेशकों के लिए नए समीकरण पैदा कर रही है।

शेयर बाजार में गिरावट और बढ़ती महंगाई का खतरा

कीमती धातुओं पर टैक्स बढ़ाए जाने का नकारात्मक असर ज्वैलरी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है, जहां कल्याण ज्वैलर्स जैसे बड़े स्टॉक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार अब पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में संभावित बड़ी वृद्धि को लेकर भी आशंकित है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि सरकार ने तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए, तो देश में महंगाई का एक बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है जो शेयर बाजार के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बनेगा।

ब्रोकर्स की बढ़ती मुश्किलें और कमोडिटी बाजार के नए अवसर

आयात शुल्क में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने कमोडिटी ब्रोकर्स और उनके क्लाइंट्स के सामने मार्जिन को लेकर बड़ी समस्या खड़ी कर दी है क्योंकि कीमतों में अचानक आए उछाल के कारण अतिरिक्त मार्जिन की तत्काल व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, इस अनिश्चितता के बीच भी बाजार विशेषज्ञ सोने और चांदी में गिरावट आने पर खरीदारी की सलाह दे रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि तेजी का यह रुख लंबी अवधि तक बना रह सकता है। दूसरी ओर, बेस मेटल्स जैसे कॉपर और नैचुरल गैस में भी हल्की बढ़त देखी जा रही है, जबकि क्रूड ऑयल की कीमतों में कुछ नरमी के संकेत मिल रहे हैं।

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