चीनी निर्यात पर संकट: वैश्विक कीमतों में गिरावट से भारत का लक्ष्य प्रभावित, कोटे से आधा ही हो पाएगा एक्सपोर्ट
नई दिल्ली: चालू विपणन सत्र 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत का चीनी निर्यात उम्मीद से काफी कम रहने का अनुमान है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, वैश्विक बाजार में कीमतों की प्रतिकूल स्थिति के कारण इस सीजन में केवल 7.5 से 8 लाख टन चीनी का ही निर्यात हो पाने की संभावना है।
कोटा ज्यादा, निर्यात कम
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश भारत में निर्यात पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में होता है। सरकार मिलों के लिए कोटा निर्धारित करती है। इस सीजन की शुरुआत में खाद्य मंत्रालय ने 15 लाख टन निर्यात की अनुमति दी थी, जिसे बाद में 5 लाख टन अतिरिक्त कोटे के साथ बढ़ाया गया। हालांकि, इस अतिरिक्त कोटे में से अब तक केवल 87,587 टन को ही मंजूरी मिल सकी है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, "फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें उतनी आकर्षक नहीं हैं कि मिलें निर्यात को प्राथमिकता दें। इस पूरे सीजन में वास्तविक भौतिक शिपमेंट 8 लाख टन के आंकड़े तक ही सिमट सकता है।"
खपत के पैटर्न में बदलाव और बढ़ता स्टॉक
रिपोर्ट के अनुसार, 3 मार्च तक भारत लगभग 5 लाख टन चीनी का निर्यात कर चुका है। दिलचस्प बात यह है कि देश में चीनी की खपत का पैटर्न बदल रहा है। मांग में वृद्धि अब स्थिर हो गई है, जिससे घरेलू स्तर पर चीनी का अधिक अधिशेष (Surplus) बच रहा है।
उत्पादन में सुधार
पिछले साल की तुलना में इस बार चीनी उत्पादन में भी मामूली बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है:
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मौजूदा सीजन उत्पादन: अब तक 27.5 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
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कुल अनुमान: सीजन के अंत तक उत्पादन 28.2 मिलियन टन रहने की उम्मीद है।
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पिछला रिकॉर्ड: साल 2024-25 में उत्पादन 26.1 मिलियन टन रहा था।

