नई दिल्ली: घरेलू सराफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार मंदी का रुख देखने को मिल रहा है। वैश्विक और स्थानीय स्तर पर मांग घटने से सोने के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी कीमती धातुओं की दरों में भारी कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों और निवेशकों द्वारा मुनाफ़ा वसूली (प्रॉफ़िट बुकिंग) किए जाने के चलते भारतीय बाजारों में भी 24 कैरेट और 22 कैरेट दोनों ही तरह के सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला बना हुआ है।
वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक कारणों से बदला मिजाज
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के मध्य एक बार फिर बढ़ते हुए राजनीतिक तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाला है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण ऊर्जा स्रोतों की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं गहरा गई हैं। इस स्थिति को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। वित्तीय नियमों के अनुसार, ब्याज दरों में वृद्धि होने पर निवेशक सुरक्षित रिटर्न वाले दूसरे विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं, जो सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक नकारात्मक कारक माना जाता है।
देश के प्रमुख महानगरों में आज के भाव
भारतीय बाजार में आज दिल्ली के भीतर 24 कैरेट सोने की कीमतें काफी नीचे आ गई हैं, जबकि 22 कैरेट के भाव में भी तदनुसार कमी देखी गई है। व्यापारिक नगरी मुंबई और कोलकाता में भी सोने की दरें इसी तर्ज पर कम दर्ज की गई हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जो कि देश के अन्य शहरों की तुलना में मामूली अंतर पर बनी हुई है। इसके अलावा पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और जयपुर जैसे बड़े शहरों के सराफा बाजारों में भी मंदी का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
औद्योगिक और स्थानीय मांग घटने से चांदी भी हुई सस्ती
सोने के साथ-साथ दूसरी सबसे महत्वपूर्ण धातु चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट का दौर जारी है। औद्योगिक इकाइयों (इंडस्ट्रीज) और स्थानीय आभूषण निर्माताओं की ओर से थोक खरीदारी में आई भारी कमी के कारण घरेलू बाजार में चांदी के भाव पर गहरा दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही, निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली भी इसके दाम नीचे लाने के लिए जिम्मेदार है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर चांदी (स्पॉट सिल्वर) की कीमतों में कमी आई है, जिसका सीधा असर भारतीय खुदरा और थोक बाजार में चांदी के प्रति किलोग्राम के भाव पर पड़ रहा है।
आगामी दिनों में बाजार की संभावित दिशा
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक सराफा बाजार में यह अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। स्थानीय बाजारों में आभूषणों की खुदरा मांग कमजोर रहने की उम्मीद है, क्योंकि ग्राहक कीमतों के और अधिक स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले समय में यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है, तो सोने-चांदी के भाव में कुछ और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

