नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मंदी के संकेतों और वैश्विक बिकवाली के दबाव में घरेलू सराफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी में मुनाफावसूली के चलते चांदी के भाव में आठ हजार तीन सौ रुपये की बड़ी गिरावट आई, जिससे यह घटकर एक लाख नब्बे हजार रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। चांदी का यह भाव पिछले करीब ग्यारह महीनों का सबसे निचला स्तर है। इससे पूर्व दिसंबर 2025 में चांदी इस निचले स्तर के आसपास कारोबार करती हुई देखी गई थी।
सोने की कीमतों में भी नरमी और सराफा बाजार का हाल
चांदी के साथ-साथ सोने के भाव में भी मंदी का रुख बना रहा। सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना तेरह सौ रुपये की गिरावट के साथ एक लाख पैंतालीस हजार दो सौ रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया। जबकि इससे पिछले कारोबारी सत्र के दौरान सोना एक लाख छियालीस हजार पांच सौ रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में मामूली बढ़त दर्ज करने वाली चांदी शुक्रवार को सीधे औंधे मुंह गिरी और एक लाख सत्तानवे हजार रुपये के स्तर से टूटकर सीधे एक लाख नब्बे हजार दो सौ रुपये प्रति किलोग्राम पर सिमट गई।
केंद्रीय बैंकों का कड़ा रुख और ब्याज दरों का प्रभाव
धातु बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के कारण दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंक अभी भी मौद्रिक नीतियों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में भले ही कई केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर अस्थायी रोक लगाई हो, लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया है कि आने वाले लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों का दौर कायम रह सकता है। ब्याज दरों में लंबे समय तक तेजी की इसी आशंका ने कीमती धातुओं के प्रति निवेशकों के आकर्षण को कमजोर किया है, जिससे सर्राफा बाजार पर प्रतिकूल दबाव पड़ा है।
भविष्य की मांग और निवेशकों के समक्ष नई चुनौतियां
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में धातुओं की मांग और आपूर्ति के संतुलन में बदलाव देखने को मिल सकता है। बढ़ते वैश्विक स्टॉक, आभूषणों की सुस्त पड़ती मांग और औद्योगिक क्षेत्र से कमजोर खपत के अनुमानों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक और आभूषण मांग में सुस्ती रहने के कारण आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना सीमित रह सकती है।

