नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिकी दबाव और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात और उसका निर्यात लगातार जारी है। भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल को संसाधित कर उससे बने पेट्रोलियम उत्पादों को यूरोपीय और पश्चिमी देशों के बाजारों में बेच रही हैं। एक अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (सीआरईए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनरियों से लगभग 1.2 अरब डॉलर (1 अरब यूरो) मूल्य के तेल उत्पाद उन देशों को भेजे गए जिन्होंने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। यह आंकड़ा पिछले माह अगस्त की तुलना में 43 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है।
जामनगर रिफाइनरी की प्रमुख भूमिका और यूरोपीय बाजारों में आपूर्ति
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, रूसी तेल को प्रोसेस कर पश्चिमी देशों को भेजने के इस कारोबार में गुजरात स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी अग्रिम मोर्चे पर रही। सितंबर महीने में यूरोपीय संघ के विभिन्न बंदरगाहों पर लंगर डालने वाले सात में से छह जहाजों में जामनगर रिफाइनरी से निकले पेट्रोलियम उत्पाद लदे हुए थे। इनमें इटली को तीन, रोमानिया को दो तथा स्पेन और साइप्रस को एक-एक खेप भेजी गई। इसके अतिरिक्त नीदरलैंड्स के रॉटरडैम पोर्ट के लिए जामनगर से करीब 1.04 लाख टन डीजल की बड़ी खेप भी रवाना की गई थी।
प्रतिबंधों के बीच पश्चिमी देशों की खरीद और नियमों में बदलाव की मांग
यूरोपीय संघ द्वारा जनवरी 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों के सीधे आयात पर रोक लगाए जाने के बावजूद, तीसरे देशों के रास्ते यह उत्पाद पश्चिमी बाजारों में निर्बाध रूप से पहुंच रहे हैं। सितंबर माह में यूरोपीय संघ ने इन रिफाइनरियों से 66.7 करोड़ यूरो, ऑस्ट्रेलिया ने 16.8 करोड़ यूरो तथा अमेरिका ने 15.4 करोड़ यूरो के उत्पाद खरीदे। इस स्थिति को देखते हुए सीआरईए ने सिफारिश की है कि जिन रिफाइनरियों में पिछले छह महीनों के भीतर रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण हुआ हो, उन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
भारत के आयात में मामूली गिरावट और रूस के लिए बड़ा बाजार
हालांकि, सितंबर महीने में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के कुल आयात में अगस्त के मुकाबले 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जामनगर रिफाइनरी में 27 प्रतिशत और पारादीप में 21 प्रतिशत आयात घटा, जबकि नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी रूसी तेल आयात में जामनगर से आगे निकल गई। इस गिरावट के बावजूद भारत अब भी रूस का एक विशाल ऊर्जा ग्राहक बना हुआ है। सितंबर में भारत ने रूस से कुल 410 करोड़ यूरो के ऊर्जा उत्पाद खरीदे, जिसमें से 360 करोड़ यूरो केवल कच्चे तेल पर खर्च हुए। विश्लेषकों का मानना है कि आयात में यह आंशिक कमी केवल कूटनीतिक दबाव नहीं, बल्कि आपूर्ति की सीमाओं और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का परिणाम है।

