कलेक्टर से मिलने 30 छात्राओं का 30 किमी पैदल मार्च,एकलव्य स्कूल के प्रिंसिपल-हॉस्टल व्यवस्था से नाराज

Ambikapur Eklavya School Girl अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से शिक्षा और छात्रावास व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. शिवपुर स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की 30 से अधिक छात्राएं करीब 30 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़ीं हैं. छात्राओं का आरोप है कि स्कूल और हॉस्टल से जुड़ी समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी परेशानियों का समाधान नहीं हुआ.

छात्राओं ने अब दूसरे अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने से इनकार करते हुए सीधे कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताने का फैसला किया है. छात्राओं के इस कदम की जानकारी मिलते ही प्रशासन में भी हलचल मच गई. प्रशासन की ओर से छात्राओं के लिए बस की व्यवस्था की गई, ताकि उन्हें इतनी लंबी दूरी पैदल तय ना करनी पड़े.

Ambikapur Eklavya School Girl:हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर छात्राओं में नाराजगी

छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल में कई तरह की समस्याएं हैं. इन समस्याओं को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.

छात्राओं के मुताबिक, शिकायतों के बावजूद जब स्थिति में बदलाव नहीं आया तो उन्होंने सामूहिक रूप से कलेक्टर के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया. इसी उद्देश्य से छात्राएं शिवपुर से अंबिकापुर की ओर पैदल निकल पड़ीं.

करीब 30 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने का फैसला इस बात को दर्शाता है कि छात्राएं अपनी शिकायतों को लेकर कितनी गंभीर हैं.

प्रिंसिपल के रवैये से भी नाराजगी

छात्राओं ने स्कूल की प्रिंसिपल की कार्यप्रणाली और रवैये को लेकर भी नाराजगी जताई है. छात्राओं का आरोप है कि स्कूल की समस्याओं को लेकर उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया.

छात्राओं का कहना है कि वे अपनी बात पहले भी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश कर चुकी हैं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण अब वे सीधे जिला प्रशासन के मुखिया यानी कलेक्टर से मिलना चाहती हैं.

हालांकि, प्रिंसिपल और स्कूल प्रबंधन की ओर से छात्राओं के इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है.

दूसरे अधिकारियों से मिलने से इनकार, बोलीं- कलेक्टर से ही करेंगे शिकायत

छात्राओं ने कथित तौर पर यह स्पष्ट किया कि वे अपनी समस्याएं अब किसी अन्य अधिकारी के सामने नहीं रखना चाहतीं हैं. उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो अब वे सीधे कलेक्टर से मिलकर अपनी बात रखेंगी.

छात्राओं का यह कदम सामने आने के बाद प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोककर समझाने और सुरक्षित तरीके से कलेक्ट्रेट तक पहुंचाने की व्यवस्था की. रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन की ओर से बस उपलब्ध कराई गई, जिससे छात्राओं को पैदल यात्रा जारी नहीं रखनी पड़ी.

कलेक्टर अजीत वसंत के सामने रखेंगी अपनी समस्याएं

छात्राएं अब कलेक्ट्रेट पहुंचकर सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के सामने अपनी शिकायतें रखने वाली हैं. इसके बाद प्रशासन की ओर से छात्राओं द्वारा उठाई गई समस्याओं की जांच और समाधान को लेकर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर रहेगी.

छात्राओं की शिकायतों की जांच जरूरी

एकलव्य आवासीय विद्यालयों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कूल और हॉस्टल दोनों ही महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में छात्राओं का इतनी लंबी दूरी पैदल तय कर कलेक्टर से मिलने निकलना प्रशासन के लिए गंभीर संकेत माना जा सकता है.

जिला प्रशासन के सामने अब चुनौती यह होगी कि छात्राओं की शिकायतों को केवल तत्काल शांत कराने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि हॉस्टल की मूलभूत सुविधाओं, भोजन, सुरक्षा, अनुशासन, प्रशासनिक व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन के व्यवहार से जुड़े आरोपों की तथ्यात्मक जांच की जाए.

यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी की जा सकती है.

पहले भी सामने आ चुके हैं आवासीय स्कूलों से जुड़े मामले

अंबिकापुर और आसपास के इलाकों में आवासीय स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं. जिला प्रशासन की ओर से स्कूलों का निरीक्षण भी किया जाता रहा है. जुलाई 2026 में कलेक्टर अजीत वसंत ने अंबिकापुर में स्कूलों समेत विभिन्न संस्थानों का औचक निरीक्षण किया था. जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2026-27 सत्र के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में छात्रावास अधीक्षक समेत विभिन्न पदों से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध है.

अब क्या होगा?

फिलहाल छात्राओं की शिकायतें सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कलेक्टर स्तर पर उनकी समस्याओं को सुना जाए और संबंधित विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी जाए. यदि छात्राओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो स्कूल और हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार के साथ जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है.

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