Jubin Garg Murder : हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मखमली आवाज के धनी सुपरस्टार सिंगर जुबिन गर्ग की मौत की गुत्थी सुलझाते-सुलझाते जांच एजेंसियां अब इस नतीजे पर पहुंची है कि जुबिन की मौत कोई हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या थी.
Jubin Garg Murder : SIT की जांच में खुलासे
जुबिन की मौत के बाद असम सरकार ने इसकी जांच के लिए एक SIT का गठन किय़ा था, जिसने अब तक जो जांच की है उसकी रिपोर्ट, इस यॉट के वीडियो फुटेज (जहां आखिरी बार जुबिन जिंदा दिखे थे), जुबिन के ही म्यूजिक टीम में बैंडमेट्स के आरोप, पैसों के लेन-देन और करीबियों की गिरफ्तारी से ये केस उलझ गया है लेकिन अब तक की जांच में ये साफ हो गया है कि जुबिन की मौत प्रकृतिक नहीं थी. ऐसे में अब सवाल ये है कि आखिर किसने और क्यों जुबिन जैसे सिंगर की हत्या कर दी होगी?
असम के मुख्यमंत्री का बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा ने असम विधानसभा में बयान दिया कि उन्हें अब तक SIT की जांच से जो अंतरिम रिपोर्ट्स मिली हैं, उनमें हत्या की तरफ संकेत साफ हैं. सीएम ने बताया कि जिन करीबी लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनमें से पांच लोगों पर हत्या की धाराएं लगाई गई हैं. सीएम सरमा ने सदन को बताया कि इस मामले में एसआईटी 8 दिसंबर तक चार्जशीट दाखिल कर देगी. हालांकि सीएम ने कहा कि इसमें क्या फआइंडिंग्स आई हैं, उसका खुलासा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद उठे नये सवाल
19 सितंबर 2025 को जुबिन गर्ग की मौत उस समय हो गई, जब वो एक संकर्ट के लिए सिंगापुर में थे.Asom Wah Geet नाम का एक कंम्यूमिटी कंसर्ट 20 नवंबर को होने वाला था लेकिन इससे पहले ही 19 सितंबर को यॉट में वो मृत अवस्था में पाये गये थे. मौत के बाद जुबिन का पोस्टमार्टम सिंगापुर में हुआ फिर भारत लाकर गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भी पोस्टमार्टम कराया गया. दोनों जगहों की रिपोर्टें जुबिन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग के पास हैं. असम CID की टीम रिपोर्टें लेकर जुबिन की पत्नी के पास पहुंची थी लेकिन पत्नी गरिमा ने ये कहते हुए रिपोर्ट्स पुलिस को वापस कर दिया कि इसे सार्वजनिक करने का फैसला CID खुद करे. ऐसे में अब ये सवाल उठ रहे है कि आखिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स में ऐसा क्या है जिसे परिवार और पुलिस दोनो सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं ?
कैसे हुई जुबिन गर्ग की मौत,आखिरी समय पर क्या हुआ?
जुबिन गर्ग एक असमिया कम्यूनिटी कंसर्ट में परफॉर्म करने के लिए 19 सितंबर को सिंगापुर में थे. उनके साथ उनके मैनेजर और बैंडमेस्ट भी थे. बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी ने जुबिन की मौत को लेकर दावा किया कि उनकी मौत डूबने से नहीं बल्कि जहर देने से हुई है. शेखर के मुताबिक सभी लोग यॉट पर सवार थे, यॉट जैसे ही समुद्र के बीच में पहुंचा मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा ने पूरे यॉट की कमान अपने हाथ में ले ली. ड्रिंक्स सर्व करने वाले लड़के तन्मय को ड्रिंक सर्व करने से रोक दिया और खुद ही सभी को ड्रिंक सर्व करने लगे. शेखर गोस्वामी का आरोप है कि जुबिन को शराब देने से पहले ही जहर दे दिया गया था.
मैनेजर ने कहा ‘जाबो दे, जाबो दे’
शेखऱ गोस्वामी जुबिन के बैंडमैट हैं और इस समय हत्या के मामले में पुलिस की कस्टडी में हैं. शेखर ने बताया कि पानी में उतरते ही जुबिन की तबीयत खराब होने लगी. वो पानी में उतरने के बाद लगातार ट्यूब पकड़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन ट्यूब तक पहुंच नहीं पाये.इस बीच जब यॉट पर सवार लोग उन्हें बचाने दौड़े तो मैनेजर सिद्धार्थ ने सभी से कहा- – “जाबो दे, जाबो दे,’ यानी उसे जाने दो.” शेखर का कहना है कि मैनेजर सिद्धार्थ ने जानबूझकर लोगों को उसे बचाने नहीं दिया. यहीं से हत्या की आशंका शुरु होती है.
शेखर की चुप्पी पर गरिमा गर्ग ने उठाया सवाल
जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा ने शेखर के इन बयानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जब शेखर को ये सब पता था तो उसने पहले जहर देने वाली बात क्यों नहीं बताई, 15 दिन तक वो चुप्प क्यों रहा ? पोस्टमार्टम होने तक या घटना के तुरंत बाद यही बातें क्यों नहीं बताई ? शेखर की चुप्पी पर CID को भी संदेह है, इसी कारण से उसे हिरासत में लिया गया है.
दूसरे बैंडमेट ने भी बढाया सस्पेंस
जुबिन के बैंड के एक और मेंबर पार्थो प्रतिम का कहना है कि जुबिन को मारने में मैनेजर सिद्धार्थ और शेखर दोनों का हाथ है. उसने पुलिस को जांच के दौरान बताया कि घटना से पहले 18 सितंबर की रात को इन दोनों ने जुबिन के साथ देर रात तक पार्टी किया था और शराब पी थी, जबकि दोनों जानते थे कि जुबिन को दौरे पड़ते थे. देर रात तक शऱाब पिलाने के बाद अगले दिन उन्हें समुद्र में उतार दिया , जो गंभीर लापरवाही कही जा सकती है.इससे दोनों की मंशा का पता चलता है.
पैसों की लेन देन को लेकर फंसा था मामला
दरअसल जुबिन की मौत को पैसो की लेन-देन से जोड़कर भी देखा जा रहा है. इस मामले में सिंगापुर में शो आर्गेनाइज करने वाले फेस्टिवल ऑर्गेनाइजर श्याम कानू महंता पर भी आरोप हैं. आरोप है कि पैसों की लेन-देन का हिसाब करने के लिए ही कथित तौर पर जुबिन को सिंगापुर बुलाया गया था.श्याम कानू महंता भी इस समय पुलिस की गिरफ्त में है.
जुबिन की हत्या के मामले में अब तक पुलिस सात लोगों को गिरफ्तारी कर चुकी है. इस सात लोगों में जुबिन के बैंड के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड सदस्य शेखऱ गोस्वामी , आयोजक श्याम कानू महंता , अमृतप्रभा महंत (बैंड सदस्य) संदीपन गर्ग (जुबिन के चचेरे भाई और DSP), नंदेश्वर बोरा (निजी सुरक्षा अधिकारी), प्रबीन बैश्य (निजी सुरक्षा अधिकारी) शामिल हैं. रक्षा कर्मी के बैंक खातों में 1.1 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन–देन मिला है, जिसने केस को और भी पेचीदा बना दिया.
फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया आखिरी वीडियो
इस मामले की जांच कर रही SIT ने अब तक 252 गवाहों से पूछताछ की है और 29 सबूत इकट्ठे किए हैं. इसके साथ ही उन वीडियोज की फॉरेसिक जांच चल रही है जो आरोपियों के मोबाइल फोन में था. पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं कुछ वीडियो डीलीट तो नहीं किये गये हैं .

