Friday, March 6, 2026

अमेरिका तय करेगा अब भारत की विदेश नीति, देश में क्यों उठ रहा है ये सवाल ?

Indian Foreign Policy : शुक्रवार को अमेरिका सरकार के एक बयान ने भारत में विदेश नीति की स्वतंत्रता को लेकर बड़ी बहस शुरु कर दी है. रुस से सस्ता तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने कहा कि वो भारत को इस बात की इजाजत देता है कि वो अगले एक महीने चाहे तो रुस से तेल की खरीद कर सकता है.

Indian Foreign Policy पर क्यों शुरु हुई बहस ?

ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान ‘स्ट्रेट ऑफ हार्मुज’ के बंद होने के कारण भारत सरकार ने ये फैसला किया है कि वो रुस से सस्ते तेल की खरीद करेगा.  भारत सरकार ने ये फैसला पहले ही कर लिया था लेकिन इस बीच अमेरिका के इस बयान नें भारत के राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है.  अमेरिका के ट्र्रेजरी सेकरेटरी स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) के हवाले से एक बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि अमेरिका भारत को अगले एक महीने तक रुस से तेल खरीदने की इजाजत देता है.

US Secretary Scott Besant to India
US Secretary Scott Besant to India

अमेरिका का बयान भारत के विदेश नीति का विफलता- कांग्रेस पार्टी   

अमेरिका के इस बयान के बाद भारत में विदेश नीति को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. खास कर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार के विदेश नीति की विफलता करार दे दिया है. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत के कई बड़े अंतरराष्ट्रीय फैसलों पर अमेरिका के प्रभाव की झलक दिखाई देती है. इसी कारण यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत की विदेश नीति अब पूरी तरह स्वतंत्र है या उस पर अमेरिका का असर बढ़ रहा है.

 अमेरिका भारत के बीच बढ़ा रक्षा और रणनीतिक सहयोग  

हाल के समय में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग काफी मजबूत हुआ है. रक्षा समझौते, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे कई मुद्दों पर दोनों देशों के रिश्ते पहले से कहीं अधिक गहरे हुए हैं. भारत ने अमेरिका के साथ कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं, जिनमें रक्षा और सुरक्षा से जुड़े करार भी शामिल हैं. इसके चलते कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विदेश नीति में अमेरिका के साथ तालमेल बढ़ता जा रहा है.

‘भारत की विदेश नीति पर किसी का असर नहीं ‘ 

हालांकि सरकार का कहना है कि भारत हमेशा से ही “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति पर चलता आया है. सरकार के मुताबिक भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ही विदेश नीति के फैसले करता है और किसी भी देश के दबाव में आकर निर्णय नहीं लिए जाते.

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आज की वैश्विक राजनीति में किसी भी देश के लिए पूरी तरह अलग-थलग रहकर नीति बनाना संभव नहीं है. अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जरूरी होती है. भारत भी अमेरिका, रूस, यूरोप और एशिया के कई देशों के साथ संतुलन बनाकर अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ा रहा है.

कुछ मामलों में भारत ने यह भी दिखाया है कि वह स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम है. उदाहरण के तौर पर रूस से ऊर्जा और रक्षा सहयोग जारी रखना, कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तटस्थ रुख अपनाना और बहुपक्षीय मंचों पर अपने हितों को प्राथमिकता देना इसकी मिसाल माने जाते हैं.

कुल मिलाकर, भारत की विदेश नीति को लेकर उठ रहे ये सवाल वैश्विक बदलते समीकरणों का हिस्सा हैं लेकिन सरकार और कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ रहा है.

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