Russia Iran Defense Cooperation : तेहरान/मॉस्को : मिडिल ईस्ट में जारी ईरान- अमेरिका इजराइल युद्ध के बीच अब रुस ने भी अपने कदम बढा दिये हैं.रुस की तरफ से ये संकेत दिया जा रहा है कि वो ईरान की सुरक्षा के लिए सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कहना है कि रूस ऐसा माहौल बनाने के लिए हर संभव कोशिश करेगा जिससे अमेरिका और इज़राइल के लिए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना असंभव हो जाए.#MiddleEast #Russia #Iran #IranWar pic.twitter.com/xMPj396w14
— The Bharat Now (@thebharatnow) March 5, 2026
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि रूस ऐसा माहौल बनाने के लिए हर संभव कदम उठाएगा जिससे अमेरिका और इज़राइल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई असंभव हो जाए. मॉस्को ने पहले भी अमेरिकी-इज़राइली हमलों की आलोचना करते हुए इस युद्ध को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक बताया था और हालात के कूटनीतिक समाधान की मांग की थी.
ईरान को मिला रुस का साथ तो मुकाबला होगा मुश्किल – विशेषज्ञ
रुस के इस कदम के बारे में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस ईरान को उन्नत सैन्य तकनीक और रक्षा सहयोग देता है, तो अमेरिका और इजराइल के लिए ईरान पर सीधा सैन्य हमला करना करीब-करीब असंभव हो सकता है.
रूस और ईरान के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ा है. दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा और कूटनीतिक मोर्चों पर एक-दूसरे के साथ साझेदारी मजबूत की है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि रूस ईरान को आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और मिसाइल सुरक्षा तकनीक उपलब्ध कराता है, तो ईरान की रक्षा क्षमता कई गुना बढ़ सकती है.
रुस की एंट्री से बदल सकता है वैश्विक समीकरण
इजराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी चिताएं जाहिर करता रहा है और कई बार संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वह सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है. वहीं अमेरिका भी ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों और दबाव की नीति अपनाता रहा है लेकिन रूस की संभावित सैन्य और कूटनीतिक ढाल इस पूरे समीकरण को बदल सकती है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस का समर्थन मिलने से ईरान ना केवल अपनी सुरक्षा मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भी बदल सकता है. इससे मध्य-पूर्व में पहले से मौजूद तनाव और जटिल हो सकता है.
ईरान को रुस की संभावित मदद के लेकर पश्चिमी देशों मे कयासों के दौर शुरु हो गये हैं. पश्चिमी देशों को आशंका है कि रूस और ईरान की बढ़ती नजदीकियां वैश्व में एक नये राजनीति ध्रुवीकरण को जन्म दे सकती हैं. खासकर यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पश्चिमी देशों के खिलाफ नए सहयोगी तलाश रहा है और ईरान इस रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है.
हालांकि अभी तक रूस की ओर से किसी औपचारिक सैन्य समझौते की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक संकेत साफ बताते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार गहरे हो रहे हैं. यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और अमेरिका-इजराइल के लिए ईरान पर हमला करना बेहद कठिन हो जाएगा.

