मिडिल ईस्ट संकट के बीच रूस का बड़ा ऑफर, क्या भारत स्वीकार करेगा सस्ता तेल प्रस्ताव?

India-Russia Oil : मिडिल इस्ट (Iran–Israel conflict) में बढ़े तनाव के बीच खबर है कि भारत अब एक बार फिर से रुस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है. भारत ने अमेरिकी टैरिफ के बाद रुस से कच्चे तेल का आयात कम कर दिया था लेकिन इस बार पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़े तनाव खासकर ईरान-इजराइल संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई में रुकावट के कारण भारत के पास अपनी उर्जा जरुरतो को पूरा करने के लिए फिलहाल कोई दूसरा नहीं है.

India-Russia oil सप्लाई पर रुसी राजदूत का बयान 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने भारत को सप्लाई बढ़ाने की तैयारी दिखाई है. रुस के राजदूत डेनिस एलिपोव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रुस हमेशा भारत कच्चे तेल का निर्यात करने के लिए तैयार है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय जल सीमा के पास समुद्र में 95 लाख बैरल (करीब 9.5 मिलियन बैरल) रूसी क्रूड पहले से जहाजों में मौजूद है. भारत अगर चाहे तो ये जल्दी ही पहुंच सकता है.

रुस भारत की जरूरत का 40% तक हिस्सा पूरा करने के लिए तैयार है. इस साल के फरवरी महीने तक भारत रुस से अपनी जरुरत का करीब 30%  तेल आयात करता था. इस साल  के फरवरी महीने तक भारत रुस से करीब 1 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल आयात कर रहा था, जो जनवरी 2026 से करीब 1.1 मिलियन से कम था. अब ईरान- इजराइल युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट संकट के कारण एक बार फिर से रुस से तेल के आयात में बढ़ोतरी की संभावना है.

भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम

रुस से तेल का आयात बढ़ाना भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए जरुरी है, क्योंकि भारत रोजाना पांच से साढ़े पांच (5-5.5 ) मिलियन बैरल क्रूड आयल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. भारत के लिए रूसी तेल सस्ता दूसरे देशो से आयात करन के मुकाबले सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, इसलिए भारत के रिफाइनर्स इसे फिर से प्राथमिकता दे रहे हैं. खबर है कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से रूस से आयात कम करने के दावे के बावजूद भारत अपनी जमीनी जरुरतों के हिसाब से हितों के आधार पर एक बार फिर से रुस से तेल का आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है.

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