Wednesday, March 4, 2026

चंद्रयान-3 की लैंडिंग के लिए 23 अगस्त 2023 ही क्यों ?

23 अगस्त 2023 भारत के लिए बेहद ख़ास है. क्योंकि आज भारत का चंद्रयान 3 चाँद पर उतरेगा. ऐसे में पूरी दुनिया की नज़र भारत पर टिकी है. चंद्रयान 3, 23 अगस्त शाम 6 बजकर 4 मिनट से चाँद पर लैंड करना शुरू करेगा. ये वो टाइम तय किया गया है कि जब चांद की सतह पर चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग होगी. बता दें चंद्रयान 3 से पहले भेजे गए चंद्रयान 2 की क्रैश लैंडिंग हुई थी. इसी वजह से इस बार तैयारी और पुख्ता है. लेकिन डर फिर भी बना हुआ है. हालाँकि इसरो के वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग होकर ही रहेगी. इसके लिए 23 अगस्त की तारीख भी बेहद सोच समझकर चुनी गई है. लेकिन क्यों 23 अगस्त ही क्यों तो आइये बताते हैं.

पहला कारण चंद्रयान-3 का लैंडर और प्रज्ञान रोवर को चांद की सतह पर उतरने के बाद अपने मिशन का अंजाम देने के लिए सौर्य ऊर्जा की जरुरत पड़ेगी. अब क्योंकि चांद पर 14 दिन तक दिन और अगले 14 दिन तक रात रहती है, अगर चंद्रयान ऐसे वक्त में चांद पर उतरेगा जब वहां रात हो तो वह काम नहीं कर पाएगा. इसलिए इसरो ने सभी चीजों की गणना करने के बाद 23 अगस्त की तारिख को चुना ताकि चांद के दक्षिणी ध्रुव सूरज की रौशनी उपलब्‍ध रहेगी.
और रात के 14 दिन का समय 22 अगस्त को ख्तम हो चुका है. अब 23 अगस्त से 5 सितंबर तक दक्षिणी ध्रुव पर धूप निकलेगी, जिसकी मदद से चंद्रयान का रोवर चार्ज हो सकेगा और अपने मिशन को अंजाम देगा.

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ISRO के पूर्व डायरेक्टर प्रमोद काले के मुताबिक, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तापमान माइनस 230 डिग्री तक चला जाता है, इतनी कड़ाके की सर्दी में दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान का काम कर पाना संभव नहीं है. यही वजह है कि 14 दिन तक जब दक्षिणी ध्रुव पर रोशनी रहेगी, तभी तक इस मिशन को अंजाम दिया जाएगा.

अब लोगों के मन में सवाल यह है कि आखिर चंद्रयान-3 के चांद पर उतरने से क्या फायदा होने वाला है? और अगर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग होती है. तो कैसे भारत विश्व चैंपियन बन जाएगा? अब से चंद्रयान-3 की चांद पर लैंडिंग में सिर्फ कुछ ही घंटे बाकी रह गए हैं.

NASA ने चांद पर इंसान के बसने का दावा किया था. लेकिन ये सब संभव कैसे होगा ये सवाल आज भी बरकरार है.  इस सवाल का जवाब भारत का चंद्रयान-3 खोजेगा. वैज्ञानिकों की मानें तो पूरी दुनिया की नजरें भारत के मिशन चांद पर टिकी हुई हैं, क्योंकि चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश होगा. अब इतनी उम्मीदें हैं तो ISRO पर और हमारे मिशन पर प्रेशर भी बहुत है. क्योंकि पहले चंद्रयान-2 विफल हो चुका है. इसरो के वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि चंद्रयान-3 में बदलावों के बाद चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग का सपना साकार होगा. और इसीलिए सबकुछ प्लान के मुताबिक चलते हुए, चंद्रयान-3 लैंडिंग फेज तक पहुंच चुका है. लैंडर विक्रम को चांद पर उतरने का काउंटडाउन भी शुरू हो चुका है. अब देखना ये है कि क्या भारत का सपना साकार होगा?

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