महाविनाश के मुहाने पर दुनिया ! अगले 80 घंटे तय करेंगे ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध होगा या सुलह?

US-Iran Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता केवल एक समझौते (Deal) से होकर गुजरता है. पूरी दुनिया की नजरें 1 मई की तारीख पर टिकी हैं. यदि अगले 80 घंटों के भीतर यूरेनियम संवर्धन और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बनी, तो खाड़ी देशों में एक बार फिर से  बड़ा महायुद्ध छिड़ सकता है. डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों ने माहौल को और अधिक गर्मा दिया है.

US-Iran Conflict : ईरान को ट्रंप की धमकी 

ट्रंप ने एक अमेरिकी न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि -‘ईरान दुनिया को तबाह नहीं कर सकता है लेकिन उसकी बढ़ती हताशा स्थिति को खतरनाक बना रही है. मैं इरान पर कोई आरोप नहं लगा रहा हूं लेकिनअगर उन्हें मौका मिला, तो वे कार्रवाई कर सकते हैं और अमेरिका इसका जवाह देने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

 यूरेनियम और होर्मुज: टकराव के दो मुख्य केंद्र

इस पूरे विवाद की जड़ में दो बड़े मुद्दे हैं. पहला, ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम, जिसे अमेरिका अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता है. दूसरा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ बीते एक हफ्ते में तनाव सबसे ज्यादा बढ़ा है. अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी करते हुए तीन विनाशकारी वॉरशिप तैनात कर दिए हैं, जिससे ईरान का तेल निर्यात ठप पड़ गया है और उसे रोजाना करोड़ों का नुकसान हो रहा है.

जहाजों पर कब्जे की जंग और सीजफायर की विफलता

कहने को तो इलाके में सीजफायर की बात चल रही थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. हाल ही में अमेरिका ने एक ईरानी जहाज को अपने नियंत्रण में लिया, जिसके जवाब में ईरान ने दो विदेशी जहाजों को उनके क्रू समेत बंधक बना लिया. ईरान का आरोप है कि ये जहाज अमेरिका की जासूसी कर रहे थे. पिछले 48 घंटों में कूटनीतिक समाधान की जितनी भी कोशिशें हुई हैं, वे विफल साबित हुई हैं.

डोनाल्ड ट्रंप की सख्त शर्तें: “मेरी शर्तों पर ही होगी डील”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे समझौते के पक्ष में तो हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर. ट्रंप का कहना है, “मैं ऐसी डील चाहता हूं जो हमेशा के लिए हो. अगर ईरान अभी समझौता नहीं करता, तो उन्हें अपनी सैन्य शक्ति दोबारा खड़ी करने में 20 साल लग जाएंगे.” ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण रहेगा और इसे तभी खोला जाएगा जब ईरान उनकी सभी बातें मान लेगा.

ईरान का पलटवार: झुकने को तैयार नहीं तेहरान

दूसरी ओर, ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. ईरानी संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने दोटूक कहा है कि अमेरिका की मांगें कभी खत्म नहीं होंगी. उनका मानना है कि अगर ईरान झुकता है, तो अमेरिका अपनी शर्तें और बढ़ा देगा. ईरान के इस सख्त रुख ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है.

क्या होगा अगर बातचीत फेल हुई?

अगर 1 मई तक कोई समझौता नहीं होता है, तो मिडिल ईस्ट में मिसाइलों और धमाकों का दौर शुरू होने की प्रबल आशंका है. ईरान की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है और उसके पास वक्त बहुत कम बचा है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस बार का टकराव पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा भयंकर और विनाशकारी हो सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख देगा.


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