Hormuz Strait Crisis : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। शनिवार को दो और भारत-चिह्नित एलपीजी (LPG) जहाज — BW Tyr और BW Elm — Strait of Hormuz से गुजरने के लिए आगे बढ़े हैं.
Indian LPG tankers BW Elm and BW Tyr begin Hormuz transit. More Indian vessels planned to pass via the strait. Indian navy playing a key role in escorting them in the Arabian sea.
Reporting: https://t.co/LCXDtMQ96W
— Sidhant Sibal (@sidhant) March 28, 2026
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से इन जहाजों ने अपने गंतव्य (destination) की जानकारी ट्रांसपोंडर के जरिए साझा नहीं की है. दोनों जहाजों ने लगभग दो हफ्ते पहले Persian Gulf से कार्गो लोड किया था और अब ईरान से सुरक्षित मार्ग मिलने का इंतजार कर रहे थे.
Hormuz Strait Crisis के बीच 6 भारतीय जहाजों को मिली मंजूरी
यदि ये दोनों जहाज सुरक्षित रूप से गुजर जाते हैं, तो कुल 6 भारतीय LPG कैरियर्स को ईरान द्वारा सुरक्षित मार्ग की अनुमति मिल चुकी होगी. इससे पहले 4 जहाज भारत पहुंच चुके हैं, जिन्हें ईरानी अधिकारियों ने होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी.
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल के साथ गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं का व्यापार होता है.
हाल के दिनों में ईरान ने इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है. यह कार्रवाई अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई बताई जा रही है.
भारत की कूटनीतिक पहल
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस संकट के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन (Masoud Pezeshkian) से दो बार बातचीत की है. उन्होंने तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया.
मंगलवार को पीएम मोदी ने कहा कि यह जरूरी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य “दुनिया के लिए खुला रहे”, ताकि ऊर्जा और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो.
भारत की ऊर्जा चिंता
भारत अपनी करीब 60% कुकिंग गैस आयात करता है, जिसमें ज्यादातर आपूर्ति Persian Gulf देशों से होती है.
इस संकट को देखते हुए भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश ने LPG उत्पादन में लगभग 50% तक बढ़ोतरी की है ताकि संभावित आपूर्ति संकट से निपटा जा सके.

