Thursday, March 12, 2026

साउदी अरब और पाकिस्तान के साथ इस्लामिक गुट में तुर्किये की एंट्री, क्या इस्लामिक NATO से बढ़ेगी भारत की चिंता ?

Islamic Nato :  दुनिया में तेजी से बदलते हालत के बीच पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मिलकर एक ऐसा संगठन बनाया था जिसमें ये समझौता हुआ था कि  इन दोनों देश में से अगर किसी एक पर भी हमला हुआ इसे संगठन के दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा. अब इस संगठन में तुर्किये भी शामिल होने जा रहा है.

Islamic Nato बनाने के लिए बात कर रहा है तुर्किये 

तुर्किये , पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बने मजबूत रक्षा समझौते में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहा है. साउदी अरब और पाकिस्तान के बीच बना ये समझौता NAO के आर्टिकल 5 की तरह है, जिसके  आर्टिकल में कहा गया है कि NATO में शामिल किसी एक देश पर कोई हमला करता है तो इसे संगठन के सभी देशों पर हमला माना जायेगा.  इसी तर्ज पर साऊदी और पाकिस्तान ने संगठन बनाया है. जानकार इसे ‘ISLAMIC NATO कह कर संबोधित कर रहे हैं.

अब सवाल ये है कि अगर ये तीनों मुस्लिम देश इस संगठन में शामिल होते हैं तो ये लोग संगठन को क्या देंगे ?

जानकारों के मुताबिक साउदी अरब के पास बहुत पैसा है तो  इस संगठन को पैसा और हर तरह से आर्थिक मदद देगा, जो इस गठबंधन को चलाने का सबसे बड़ा फैक्टर होगा.

वहीं पाकिस्तान के पास  न्यूक्लियर हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल और सेना  है तो वो इन चीजों से संगठन को मजबूती देगा. इस्लामिक देशों में पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है ,जिसके पास परमाणु हथियार मौजूद है.

इस्लामिक संगठन में अगर तुर्किये शामिल होता है तो इससे संगठन को काफी मजबूती मिल जायेगी. तुर्किये के पास  मजबूत मिलिट्री एक्सपीरियंस, घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री और आधुनिक हथियार हैं, जिससे वो संगठन  को मजबूत कर सकता है. तुर्किये नाटो का भी सदस्य है और इसके पास अमेरिका के बाद इसकी दूसरी सबसे बड़ी सेना है. खबरों के मुताबिक तुर्किये पाकिस्तान के लिए कोरवेट वॉरशिप बना रहा है.  F-16 फाइटर विमानों को अपग्रेड कर रहा है, इन देशों के साथ अपनी  ड्रोन टेक्नोलॉजी शेयर कर रहा है. इसके साथ ही कान फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर जेट प्रोग्राम में साउदी अरब और पाकिस्तान को शामिल करने की बात भी कर रहा है.

टर्की के थिंक टैंक TEPAV के रणनीतिकार निहात अली ओजकान का कहना है कि अमेरिका अपने और इजरायल के फायदे पर ज्यादा फोकस कर रहा है. इस लिए ये दोनों देश अपने लिए नए दोस्त और दुश्मन तय कर रहे हैं.

तीनों देशों के बीच बन रहा है गठजोड़

हाल ही में तुर्किये की राजधानी अंकारा में तीनों देशों के नौसेना की पहली बैठक हुई. बैठक के बारे में तुर्किये की डिफेंस मिनिस्ट्री ने कन्फर्म किया है.

तीनों देश ( साउदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये) में ईरान पर हो रहे हमले को लेकर चिंता है. इनका कहना है कि ईरान से  जंग नहीं बल्कि बातचीत होनी चाहिये.

तीनों देश सीरिया में मौजूद सुन्नी सरकार और फिलिस्तीन राज्य का समर्थन करते हैं.

 गठबंधन बना तो भारत पर भी होगा असर ?

पाकिस्तान -साउदी अरब और तुर्किये  के नये NATO प्लान पर भारत की नजर है. तुर्किये लंबे समय  से NATO का सदस्य है. पिछले साल मई 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच आपरेशन सिंदूर  हुआ तो  तुर्किये ने पाकिस्तान के लिए खुलकर काम किया. अपने हथियार और सेना दोनों से पाकिस्तान की मदद की.

जानकारों के मानना है कि अगर पाकिस्तान , साउदी अरब और तुर्किये के बीच संगठन बना तो ये दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति को बदल सकता है.हलांकि एक्सपर्टस का कहना है कि इन तीनों देशो के गठबंधन मुख्य रूप से ईरान और क्षेत्रीय चुनौतियों से निबटने के लिए है, भारत या इजरायल के लिए नहीं लेकिन भारत फिर भी बहुत सतर्क है क्योंकि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान और तुर्किये पहले से भारत के खिलाफ बोलते रहे हैं.

 

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