Tulsi Gabbard वॉशिंगटन: अमेरिका की खुफिया प्रमुख (Director of National Intelligence-DNI)और पूर्व सांसद तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है. गबार्ड ने कहा है कि पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए एक गंभीर परमाणु खतरा (Nuclear Threat) बन चुका है. डोनाल्ड ट्रंप की बेहद करीबी मानी जाने वाली गबार्ड का यह बयान वैश्विक राजनीति में हलचल मचाने वाला है.
Tulsi Gabbard ने बताया – 5 देशों से अमेरिका को सबसे ज्यादा खतरा
बुधवार को एक महत्वपूर्ण ब्रीफिंग के दौरान तुलसी गबार्ड ने उन देशों की लिस्ट साझा की,जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। उनके मुताबिक: पाकिस्तान,रूस,चीन,उत्तर कोरिया और ईरान वो देश हैं जिनसे अमेरिका को सबसे अधिक खतरा है.
गबार्ड ने चेतावनी दी कि ये देश लगातार नई मिसाइल डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं. इन मिसाइलों की खासियत यह है कि इनमें परमाणु (Nuclear) और पारंपरिक (Conventional) दोनों तरह के वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो सीधे अमेरिका को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं.
खुफिया रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी को दी गई अपनी लिखित गवाही में गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देश अपनी मिसाइल तकनीक के रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर भारी निवेश कर रहे हैं.
“उत्तर कोरिया अब रूस और चीन के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर रहा है, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए एक नई और जटिल चुनौती है”- तुलसी गबार्ड
ईरान और ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ का जिक्र
ईरान के मुद्दे पर बात करते हुए गबार्ड ने एक राहत भरी जानकारी भी दी. उन्होंने बताया कि “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के बाद ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम (Nuclear Enrichment Program) पूरी तरह से खत्म हो गया था और फिलहाल इसे दोबारा शुरू करने के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं.
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा:
- ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: इस ऑपरेशन के कारण ईरान की सैन्य शक्ति को बड़ा नुकसान पहुँचा है.
- मौजूदा स्थिति: भले ही 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद ईरानी सरकार कमजोर हुई है, लेकिन वह अभी भी मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा बनी हुई है. वैश्विक सुरक्षा पर छिड़ी बहस तुलसी गबार्ड के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु हथियारों की रेस और वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। खासकर पाकिस्तान का नाम ‘परमाणु खतरे’ की सूची में शामिल करना दक्षिण एशिया की राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकता है.

