Trump C-5 Forum : दुनिया में टैरिफ लगाकर टेरर मचाने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के पांच आर्थिक महाशक्तियों को मिलाकर एक फोरम बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका, भारत,रुस,चीन और जापान को मिलकर एक कोर फाइव यानी C-5 फोरम बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं. इस फोरम को बनाने का अमेरिकी राष्ट्रपति का उद्देश्य G7 जैसे यूरोप-केंद्रित समूहों से आगे निकलने की है.
Trump C-5 Forum करेगा वर्ल्ड-ऑर्डर चेंज ?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नई ग्रुपिंग में आर्थिक महाशक्तियों की जगह पर उन देशो को एक मंच पर लाने की कोशि है जिनकी आबादी बड़ी है और जो सैन्य-आर्थिक ताकत वाले देश हैं.जानकारों का मानना है कि इन देशो को एक मंच पर लाने का मकसद डील-मेकिंग पर जोर देना है.
मल्टीपोलर वर्ल्ड के लिए नया मंच बनेगा
अमेरिकी अखबार पॉलिटिको के एक आर्टिकल के मुताबिक G7 और G20 जैसे मौजूदा फोरम इस समय की विश्व अर्थव्यस्था को सही प्लेटफार्म देने के लिए नाकाफी है. ट्रंप के इस नये ग्रुप से मल्टीपोलर वर्ल्ड के लिए नया मंच बनेगा.
C-5 की पहली बैठक का क्या होगा एजेंडा ?
इस फोरम के गठन का उद्देश्य इसकी पहली मीटिंग के एजेंडे से साफ होता नजर आ रहा है. पहली मीटिंग का टॉपिक एजेंडे में सबसे पहला एजेंडा मिडिल ईस्ट सिक्योरिटी, खासकर इजराइल-सऊदी अरब के रिश्तों को नॉर्मलाइज करने पर विचार करने का है .ट्रंप का यह प्लान नॉन-आइडियोलॉजिकल है. इसमें मजबूत लीडर्स और ताकतवर देशों को एक मंच पर लाना है.
एक बार फिर वापसी के लिए बनी ट्रंप की योजना ?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ऑफिस की तरफ से ये योजना तब आई है, जब वॉशिंगटन में ये बहस चल रही है कि ट्रंप अगर एक और टर्म आये तो ये वर्ल्ड ऑर्डर को कितना उलट-पुलट करेंगे ? व्हाइट हाइस के मुताबिक ट्रंप ग्रुप-7 ( G7 ) को पुराना मानते हैं. ट्रंप मानते है कि ये वो समूह है जो अमीर और डेमोक्रेटिक देशों तक ही सीमित है. C-5 ज्यादा व्यवहारिक और पावर-बेस्ड होगा.
कोर 5 बना तो ये ट्रंप की विदेश नीति में बड़ा शिफ्ट होगा
इस समय कोर-5 यानी C-5 के गठन को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन जानकारों का ये मानना है कि अगर ऐसा कोई फोरम बनाता है, तो ये ट्रंप की विदेश नीति में बड़ा शिफ्ट होगा. इसमें चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों को एक टेबल पर लाया जा सकता है. अमेरिकी एलाइज इसे ‘मजबूत को स्वीकार्यता’ देने वाला फैसला मानते हैं, वहीं भारत के लिए यह मिडिल ईस्ट और इंडो-पैसिफिक मुद्दों पर नया मौका हो सकता है. अमेरिका इस फोरम के माध्यम से रूस को यूरोप के देशों पर प्राथमिकता देकर यूरोपीय देशों ( वेस्टर्न यूनिटी) और NATO को कमजोर कर सकता है.

