ट्रंप का यू-टर्न ! युद्धविराम की बात के बीच ईरान को फिर दी बमबारी की धमकी

Donald Trump : ईरान के साथ संभावित युद्धविराम और समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक और बयान सामने आया है, जिसने मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ समय पहले तक समझौते और तनाव कम करने की बात करने वाले ट्रंप अब फिर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं. उनके ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की ईरान नीति अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

Donald Trump -डील फाइनल नहीं, शर्तें नहीं मानीं तो बम बरसेंगे’

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है. उनके मुताबिक यह केवल एक प्रारंभिक समझ (MoU) है और यदि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा.

ट्रंप ने कहा, “अगर उन्होंने ढंग से बर्ताव नहीं किया तो हम सीधे उनके सिर पर बम गिराएंगे.” यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई देश क्षेत्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहे हैं.

शांति की बात या दबाव की राजनीति?

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान उनकी पारंपरिक ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति का हिस्सा हो सकता है. हालांकि आलोचकों का कहना है कि एक ओर बातचीत और समझौते की बात करना तथा दूसरी ओर खुलेआम बमबारी की धमकी देना कूटनीतिक प्रक्रिया को कमजोर करता है.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान न केवल ईरान-अमेरिका संबंधों को और जटिल बनाते हैं बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने का खतरा भी पैदा करते हैं.

ओबामा की नीति पर फिर हमला

अपने बयान में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की ईरान नीति पर भी निशाना साधा.उन्होंने दावा किया कि ओबामा प्रशासन ने JCPOA परमाणु समझौते के तहत ईरान को भारी आर्थिक राहत और नकद धनराशि दी थी. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कभी “पैसे देकर समस्या सुलझाने” की कोशिश नहीं की और हमेशा सख्त रुख अपनाया.

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि JCPOA को उस समय कई पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का समर्थन प्राप्त था तथा इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था.

खाड़ी देशों के फंड को लेकर भी किया दावा

ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि खाड़ी देशों के सहयोग से 300 अरब डॉलर का निर्माण फंड तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस तरह की किसी योजना में पैसा नहीं लगाएगा.

ट्रंप का कहना था कि खाड़ी देश भी ईरान के व्यवहार को देखकर ही कोई बड़ा निवेश निर्णय लेंगे. यह बयान क्षेत्रीय राजनीति में ईरान के प्रभाव और उसके भविष्य को लेकर जारी अनिश्चितताओं को दर्शाता है.

ईरान की सैन्य ताकत तबाह करने का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में ईरान की नौसेना, वायुसेना और रक्षा प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया. उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिकी नौसेना ने गुप्त अभियानों में ईरान के कई जहाजों को नष्ट किया.

हालांकि ट्रंप के इन दावों को लेकर स्वतंत्र स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। कई रक्षा विशेषज्ञ ऐसे बयानों को राजनीतिक संदेश और घरेलू समर्थन जुटाने की रणनीति के रूप में भी देखते हैं।

क्या बढ़ेगा मध्य पूर्व में तनाव?

ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका वास्तव में कूटनीतिक समाधान चाहता है या फिर सैन्य दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। युद्धविराम और समझौते की संभावनाओं के बीच बार-बार बदलते बयानों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया कमजोर पड़ती है तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी शांति प्रयासों के लिए नई चुनौती बन सकती है।

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