दिल्ली अमेरिका में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही है. इस बार अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए एक नहीं बल्कि तीन तीन भारतीय दावा ठोकने की तैयारी में हैं.
भारतीय मूल के मात्र 38 साल के इंजीनियर हिरष वर्धन सिंह (Hirsh Vardhan Singh) ने अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर उतरने का फैसला किया है.38 साल के हिरष वर्धन सिंह पेशे से एयरोस्पेस इंजीनियर हैं और रिपब्लिकन पार्टी से चुनाव में उतरने की तैयारी में हैं.निक्की हेली और विवेक रामास्वामी के बाद हिरष वर्धन सिंह (Hirsh Vardhan Singh) तीसरे उम्मीदवार हैं जो अमेरिका के रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.
I'm entering the race for President.https://t.co/OEHCSYOdvK pic.twitter.com/RyxW4sKMSW
— Hirsh Vardhan Singh (@HirshSingh) July 27, 2023
Hirsh Vardhan Singh ने किया वीडियो ट्वीट
हर्षवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्वीटर पर एक ट्टीट किया है जिसमें दावा किया है कि मैंने न्यूजर्सी में रिपब्लिकन पार्टी को मजबूत करने के लिए बहुत कोशिश की है.हमेशा अमेरिका फर्स्ट की पॉलिसी मानी है और जीवन भर एक समर्पित रिपब्लकिन रहा हू. हर्षवर्धन सिंह ने बताया है कि उन्होंने फेडरल इलेक्शन कमीशन के सामने अपनी उम्मीदवारी के लिए दावा दाखिल कर दिया है.हर्षवर्धन सिंह ने खुद को एक मात्र प्योर ब्लड बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी कोविड का टीका नहीं लिया इसलिए वो एकमात्र प्योर ब्लड हैं.
उम्मीदवार का नाम तय करने के लिए होगी बैठक
चुनाव अगले साल होंगे और इसके लिए रिपब्लिकन पार्टी अपने उम्मीदवारों के नाम बैठक में तय करेंगे. फिलहाल जो जानकारी सामने आ रही है उसमें डोनाल्ड ट्रंप का नाम सबसे आगे चल रहा लेकिन ट्रंप कानूनी दावपेंचों में फंसे हैं. ऐसे में सारा दोरोमदार पार्टी की बैठक पर ही टिका है. नाम तय करने के लिए 15 से 18 जुलाई 2024 में बैठक होगी, जिसमें फाइनल उम्मीदावार का नाम तय होगा.
Hirsh Vardhan Singh का राजनीतिक इतिहास
38 साल के हर्षवर्धन सिंह ने राष्ट्रपति पद पर दावा करने से पहले 2017 और 2021 में न्यूजर्सी के गवर्नर के लिए उम्मीदवार रह चुके हैं. 2018 में हाउस सीट ऱऔ 2020 में अमेरिकी सिनेट के लिए चुनाव ल़ॉ चुके हैं लेकिन किसी में अभी तक सफलता नहीं मिली है. हर्षवर्धन ने गवर्नर के चुनाव के दौरान पब्लिक के बीच डोनाल्ड ट्रंप की तरह एक ओर्थोडोक्स नेता के रुप में अपनी छवि बनाने की कोशिश की लेकिन इसमें भी वो तीसरे नंबर पर रहे.

