दिल्ली से पटना के बीच चलेगी वंदे भारत स्लीपर…12 दिसंबर के बाद फाइनल ट्रायल की तैयारी

Vande Bharat Sleeper Train : पटना से दिल्ली और दिल्ली से पटना के लिए सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत के स्लीपर सर्विस का इतंजार कर रहे यात्रियों के लिए रेलवे की तरफ से खुशखबरी आई है. स्लीपर वंदे भारत का इंतजार इसी महीने पूरी होने जा रही है. रेलवे ने दिल्ली पटना रुट पर स्लीपर वंदे भारत दौड़ाने की तैयारी कर ली है. 12 दिसंबर क बाद इस रुट पर ट्रेन का फाइनल ट्रायल शुरु हो सकता है.

Vande Bharat Sleeper Train
Vande Bharat Sleeper Train

Vande Bharat Sleeper Train में होंगे 16 कोच

रेलवे ने सबसे पहले स्लीपर वंदे भारत के लिए 16 कोट वाली ट्रेन चलाने का फैसला किया है, इसमें कुल मिलकर 827 वर्थ होंगे. ट्रेन में फर्स्ट एसी का 1 कोच, , सेकेंड एसी के 4 कोच, थर्ड एसी के 11 लगे होंगे. AC 3-टीयर के 11 कोच में 611  बर्थ, एसी 2 टियर के 4 कोच में 188 बर्थ और एसी फर्स्ट क्लास के 1 कोच में 24 बर्थ होंगे. दानापुर मंडल रेल अधिकारियो के मुताबिक इस महीने के अंत तक दिल्ली से पटना के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का परिचालन शुरू करने की तैयारी है.

सप्ताह में कितने दिन चलेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ?

देश भर में अभी वंदे भारत ट्रेन सप्ताह में 6 दिन ही चलती है. इसी तर्ज पर पटना से दिल्ली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का भी परिचालन किया जायेगा. ये ट्रेन दिल्ली से तेजस राजधानी की समय सारणी के आसपास चलेगी और रात को चल कर सुबह पटना के राजेंद्र नगर पहुंचेगी. वहीं पटना से ये ट्रेन राजेंद्र नगर रेलवे स्टेशन से तेजस राजधानी के समय के आसपास शाम को खुलेगी और अगले दिन सुबह नई दिल्ली पहुंचेगी. फिलहाल ट्रेन के चलने और पहुंचने के समय का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है.

 वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों को मिलेगी ये खास सुविधाएं

इस ट्रेन में वर्तमान चेयरकार की जगह पर स्लीपर सीट्स होंगी. दरवाजे स्वचालित होंगे. कोच के अंदर बायो-टॉयलेट, , रीडिंग लाइट्स, सीसीटीवी भी लगा होगा, जो सुरक्षा के लिहाज से जरुरी हैं. इसके अलावा इसे बेहद खूबसूरत और आरामदायक इंटीरियर के साथ डिडाइन किया गया ताकि यात्री अपने सफर की लुत्फ उठा सकें.

इस ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलने के लिए डिजाइन किया गया है . सुरक्षा के लिहाज से इसमें कवच सिस्टम और क्रैश-प्रूफ डिजाइन जैसी हाइ टेक्नोलॉजी लगी है.रेलवे का कहना है कि अगर यात्रियों की संख्या बढ़ी तो डिब्बों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 तक की जा सकती है.

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