Tuesday, December 9, 2025

SIR को कारण बताकर जान देने वाले BLO का वीडियो वायरल,रोते हुए बोलता रहा- मां मैं जीना चाहता हूं…देशभर में अबतक इतने BLO दे चुके हैं जान

SIR BLO Viral Video : देश भर के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे SIR के कामों के बीच कई बूथ लेवल अफसरों (BLO) के आत्म’हत्या की खबरें सामने आ रही हैं .हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से बीएलओ  सर्वेश सिंह की आत्म’हत्या की खबर आई. सर्वेश सिंह के सु’साइड नोट में ‘टारगेट’ पूरा ना होने के बीत कही गई थी.

अब सर्वेश सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसे उनकी मौत से ठीक पहले का बताया जा रहा है. वीडियो में वो फूट फूट कर रोते हुए नजर आ रहे हैं. सर्वेश सिंह पेशे से शिक्षक थे और उन्हें चुनाव के कार्यों मे लगाया गया था. 30 नवंबर को उन्होने अपने घर में ही फंदा लगाकर अपनी जान दे दी थी. मौत से पहले उन्होने जो वीडियो बनाया था उसमें वो अपनी मां से कहते नजर आ रहे हैं कि- मां मैं जीना चाहता दूं…

 SIR BLO Viral Video:इंटरनेट पर वायरल हो रहा है वीडियो

बीएलओ सर्वेश सिंह इस वीडियो में बुरी तरह से रोते हुए नजर आ रहे हैं. रोते-रोते वो कह रहे है कि अब काम का बोझ सह नहीं पा रहे हैं. सर्वेश के मरने से ठीक बनाये इस भावुक वीडियो में वो अपना दर्द अपनी मां को बता रहे हैं. वीडियो ने पूरे इंटरनेट के हिला रखा है.

वीडियो के सामने आने के बाद परिवार और लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है. परिजन मांग कर रहे हैं कि जिन लोगों ने सर्वेश सिंह पर इतना दबाव बनाया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

जाते-जाते अपनी मां को बोल गये ये बात

सर्वेश सिंह अपने इस वीडियो में लगातार रो रहे हैं और रोते हुए अपनी मां से कह रहे है कि “मम्मी मेरे बाद मेरे बच्चों का ख्याल रखना. मुझसे नहीं हो पा रहा है. मैं नहीं कर पा रहा है. मैं निपुण नहीं हूं. मेरी पत्नी बबली मुझे माफ करना. मैं तुम्हारी दुनिया से दूर जा रहा हूं. मेरे बच्चों का ध्यान रखना.”

इस वीडियो पर फिलहाल प्रशासन की तऱफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन पुलिस इस वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है.

 देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है SIR 

आपको बता दें कि चुनाव आयोग के द्वारा देशभर के 12 राज्यों में शुरु हुए SIR के बाद लगातार कई बीएलओ की मौत की खबरे आई हैं. अब तक के आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 25 और अधिक से अधिक 41 मौतें हो चुकी हैं. इनमें से कुछ मौते सीधे तौर पर चुनाव आयोग के SIR के अत्यधिक दवाब के कारण तो कुछ मौतों को उनके परिवार वालों ने व्यक्तिगत दवाब करार दे दिया है.

देश भर में कहां-कहां हुई मौतें

आपको बता दें कि अब तक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, गुजरात राजस्थान, केरल और तमिलनाडु तक से बीएलओ की मौत की खबरे आई हैं.

अकेले उत्तर प्रदेश में अब तक 5 से 6 बीएलओ के मौत की खबरें हैं. इनमें 30 नवंबर को मुरादाबाद में शिक्षक सर्वेश सिंह, 25 नवंबर को गोंडा में विपिन यादव (जहर खाकर) , 25 नवंबर को ही फतेहपुर में सुधीर कुमार कोरी (अपनी शादी से केवल एक दिन पहले) , 3 दिसंबर को मेरठ में मोहित कुमार (जहर खाकर जान देने का प्रयास किया) और 3 दिसंबर को ही महोबा में  शंकर लाल राजपूत ने कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी.

बात करें पश्चिम बंगाल की तो यहां 22 नवंबर को नादिया में  रिंकी तारफदार नाम की शिक्षिका ने अपनी जान दे दी. अपने सुसाइड नोट में उन्होंने ECI को जिम्मेदार ठहराया. पश्चिम बंगाल में दूसरा मामला 19 नवंबर को जलपाईगुड़ी से आया, जहां शांति मणि एक्का नाम की बीएलओ ने अपनी जान दे दी. इस राज्य में तीसरा मामला पूर्वी बर्धमान जिले से आया जहां नमिता हांसदा नाम के बीएलओ को हार्ट स्ट्रोक आया. स्ट्रोक की वजह अत्यधिक दवाब बताया गया.

पश्चिम बंगाल के बाद बात गुजरात की.. यहां 21 नवंबर को गिर सोमनाथ में अरविंद वढेर नाम के बीएलओ ने अपनी जान दे दी. सुसाइड नोट में अपनी मौक का कारण “मानसिक बोझ” बताया.

इसी तरह 16 नंवंबर को राजस्थान के जयपुर में मुकेश जांगिड ने ट्रेन के सामने कूद कर अपनी जान दे दी.सुसाइड नोट में लिखा “सस्पेंशन का डर”था. वहीं राजस्थान में दूसरा मामला सवाई माधोपुर से  हरिओम बैरवा की मौत का आया. यहां भी मौत की वजह अत्यधिक दवाब ही बताया गया.

मध्यप्रदेश  में उदयभान सिंह सिहारे और  कविता कड़ेला जो नायब तहसीलदार के पद पर तैनात थे और फिलहाल चुनाव आयोग की ड्यूटी पर थे, उन्होने अपनी जान ले ली.

दक्षिण भारत के राज्य केरल से कन्नूर से 16 नवंबर को सु’साइड का मामला आया जहां  अनीश जॉर्ज नाम के बीएलओ ने अपनी जान ले ली.

वहीं तमिलनाडु में आंगनबाड़ी सेविका का काम करने वाली जहिता नाम की बीएलओ ने अपनी जान ले ली.

क्या है अत्यधिक दवाब का कारण ?

बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर मतदाता पहचान पत्र के रिविजन का जो काम चल रहा है, उनमें कई ऐसे काम है, जो अत्यधिक दवाब वाले हैं. BLO को 900-1000 वोटरों के फॉर्म भरने, डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन और डिजिटल अपलोडिंग का लक्ष्य 30-40 दिनों में पूरा करना है.

इन चुनाव कर्मियों को कोई स्पेशल ट्रेनिंग नहीं दी गई है. लगातार सर्वर फेलियर और अधिकारियों के द्वारा काम पूरा ना होने पर सस्पेंशन की धमकी जैसे दवाब तनाव बढ़ाते हैं.इन बीएलओ को दिन के 14 से 18 घंटे प्रतिदिन काम करना पड़ रहा है, जिसके लिए उन्हे केवल ₹500 से 1000 रुपया प्रति बूथ मिलता है,जबकि ये अतिरिक्त ड्यूटी है.

इस बीच हर जगह पर बीएलओ पर राजनीतिक दवाब भी है. कांग्रेस और विपक्ष लगातार SIR को “वोट चोरी का हथकंडा” बता रहा है. खासकर दलित/पिछड़े वोटरों के नाम काटने का डर लोगों के बीच वीएलओज की परेशानी बढ़ा रहे है. चुनाव आयोग ने डेडलाइन 7 दिन बढ़ाकर 4 दिसंबर से 11 दिसंबर कर दिया लेकिन दबाव कम नहीं हुआ है.

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