Swami Avimukteshwara Nand : अपने मठ में यौन शोषण के आरोप झेल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी के उस आदेश पर रोक लगी दी है, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत कई लोगों पर झूंसी में पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था. इस आदेश के तहत कोर्ट ने फिलहाल जांच पूरी होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगी दी है.
#अविमुक्तेश्वरानन्द महाराज मामला ..
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाई,फैसला आने तक रोक..
शंकराचार्य पर आरोप लगाने वाले बटुक कभी उनके विद्या मठ आश्रम में रहे ही नहीं!
खुद सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल ने इस सत्य को स्वीकार किया!!
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि ये… pic.twitter.com/TMSCwiQE8l— Ambrish Shashi Singh (@ambrish_singh88) February 27, 2026
Swami Avimukteshwara Nand की याचिका पर हुई सुनवाई
प्रयागराज के झूंसी थाने में अपने और अपने शिष्य मुकुंदानद के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों के खिलाफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी. शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. आरोप लगाने वाले पक्ष की तरफ से बयान और सबूत पेश किये गये लेकिन कई गवाहों ने स्वामी के पक्ष में बात कही. कोर्ट में सुनवाई करीब एक घंटे से ज्यादा देर तक चली. सबी पक्षो को सुनने के बाद मामले पर फिलहाल कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है . स्वामी के अग्रिम जमानत की याचिका पर विस्तृत फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में आने की उम्मीद है.
कोर्ट ने फिलहाल फैसला आने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और संबंधित अन्य लोगों की गिरफ्तारी पर रोक (stay on arrest) लगा दी है. कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आदेश सुनाए जाने तक कोई coercive action (जैसे गिरफ्तारी) नहीं होगी.इसके साथ ही कोर्ट ने स्वामी को जांच में पूरा सहयोग करने का भी आदेश दिया है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद के आश्रम में खुशी का महौल
कोर्ट के फैसले के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आस्रम में होली का माहौल है, खुद स्वामी ने बटुको को रंग गुलाल लगा कर अपन जीत की खुशी मनाई.
कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आज से साफ हो गया कि उनके उपर लगाये गये सारे आरोप “झूठे” थे और उनको “साजिश” के तहत फंसाया गया था. अपनी सत्यता साबित करन के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नार्को टेस्ट या पॉलीग्राफ टेस्ट देने की भी पेशकश की है.

