Thalapathy Vijay TVK Govt : तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर है, जहाँ हर पल समीकरण बदल रहे हैं. विधानसभा चुनाव के नतीजों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण चेन्नई से लेकर दिल्ली तक सस्पेंस बना हुआ है. इसी बीच, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके (DMK) ने एक ऐसा राजनीतिक संकेत दिया है, जिसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है.
#WATCH | Chennai, Tamil Nadu | On being asked if an alliance between DMK and AIADMK is possible, DMK spokesperson TKS Elangovan says, “…I don’t think it is possible because we, DMK and AIADMK, are the major enemies in Tamil Nadu politics…” pic.twitter.com/Cal8T2BPU2
— ANI (@ANI) May 8, 2026
Thalapathy Vijay TVK Govt के लिए DMK का ‘रिजॉल्यूशन 3’
7 मई को हुई डीएमके विधायक दल की बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए, लेकिन सबकी नजरें ‘रिजॉल्यूशन 3’ पर टिकी हैं. इस प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “तमिलनाडु फिलहाल एक और चुनाव के लिए तैयार नहीं है और राज्य के विकास के लिए एक स्थिर सरकार का होना अनिवार्य है.” राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह लाइन सीधे तौर पर थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने जैसा है.
विजय की टीवीके: सबसे बड़ी पार्टी मगर बहुमत से दूर
सुपरस्टार थलापति विजय की पार्टी टीवीके इस चुनाव में सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है. हालांकि, बहुमत के जादुई आंकड़े (118 सीटें) तक पहुँचने में वह अब भी पीछे है. कांग्रेस का साथ मिलने के बाद भी विजय सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिख रहे थे, लेकिन अब डीएमके के रुख ने उनके लिए सत्ता की राह आसान कर दी है.
स्टालिन की ‘चाणक्य चाल’ के पीछे के 2 बड़े कारण
अगर एमके स्टालिन बाहर से समर्थन देने का फैसला करते हैं, तो इसके पीछे दो बेहद सोची-समझी रणनीतियां मानी जा रही हैं:
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द्रविड़ मॉडल की सुरक्षा: डीएमके की पहचान उसकी जन कल्याणकारी योजनाओं से है. मुफ्त स्कूल ब्रेकफास्ट योजना और महिलाओं को मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता जैसी योजनाओं को स्टालिन हर हाल में जारी रखना चाहते हैं. बाहर से समर्थन देकर वह नई सरकार पर इन योजनाओं को न बदलने का दबाव बना सकते हैं.
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सरकार पर लगाम: सरकार का हिस्सा न बनकर डीएमके विपक्ष की भूमिका भी निभाएगी और जरूरत पड़ने पर ‘समर्थन वापसी’ की तलवार भी लटकाए रखेगी. इससे स्टालिन के पास सत्ता की चाबी हमेशा सुरक्षित रहेगी.
भाजपा और कांग्रेस की बढ़ी धड़कनें
स्टालिन के इस संभावित कदम ने भाजपा और अन्य क्षेत्रीय दलों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं. यदि विजय और स्टालिन एक धुरी पर आते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है. फिलहाल सबकी नजरें राजभवन और डीएमके के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हैं.

