दिल्ली : दिवंगत आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (SUPREME COURT )ने बिहार सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है. IAS जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने बिहार के नेता आनंद मोहन (ANAND MOHAN) की जेल से समय से पहले रिहाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी और मांग की थी कि रिहाई को रद्द कर उसे वापस जेल भेजा जाये.
सुप्रीम कोर्ट में क्या दी गई दलील ?
आनंद मोहन की रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता दिवंगत जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की तरफ से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए . सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट के सामने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण मामला है.
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, केंद्र और आनंद मोहन से मांगा जवाब
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ ने इस मामले में बिहार सरकार और केंद्र सरकार नोटिस जारी किया और मामले से संबंधित अधिकारियों से मामलों से संबंधित पूरा रिकॉर्ड मंगवाया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर बिहार सरकार, केंद्र सरकार, आनंद मोहन से जवाब मांगा है.
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी केजे अल्फोंस करेंगे कोर्ट की मदद
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी केजे अल्फोंस की उस याचिका को भी स्वीकार कर लिया है जिसमें उन्होंने माननीय कोर्ट के सामने इस मामले में अदालत को सहायता प्रदान करने की अनुमति की मांग की थी. अब इस मामले मे वरिष्ठ सेवानिवृत आईएएस अधिकारी केजे अल्फोंस अदालत की मदद करेंगे.
आनंद मोहन का क्या है मामला ?
दिवंगत जीकृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने अपने पति के हत्यारे आनंद मोहन की आजीवन कारावास की सजा जेल मैनुअल मेँ बदलाव कर कम करने और उसे छोड़ देने के बिहार सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौति दी थी. उमा कृष्णैया ने दलील में कहा कि बिहार राज्य ने खास तौर पर आनंद मोहन के रिहाइ सुनिश्चित करने के लिए बिहार जेल मैनुअल 2012 में बदलाव कर 10 अप्रैल 2023 को संशोधन किया है. इस बदलाव को इस तरह से किया गया कि ये सुनिश्चित किया जा सके कि दोषी आनंद मोहन को छूट का लाभ मिल जाए.
उमा कृष्णैया ने कहा कि दिनांक 10 अप्रैल 2023 का संशोधन दिनांक 12 दिसम्बर 2002 की अधिसूचना के साथ-साथ लोकनीति के विरुद्ध है और इसके परिणामस्वरूप राज्य में सिविल सेवकों का मनोबल गिरा है. इसलिए ये फैसला दुर्भावना ग्रस्त है. इस फैसले से ये सिद्ध हो गया है कि वर्तमान सरकार मनमाने ढंग से और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विपरीत काम कर रही है.
आनंद मोहन 27 अप्रैल को जेल से हुए थे रिहा
गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन सिंह तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट जी कृष्णैया की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे और अदालत से 1994 में पहले फांसी की सजा दी घई थी जिसे फिर एक साल बाद बदलकर आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. सजा के 21 साल बाद 27 अप्रैल 2023 को आनंद मोहन को बिहार सरकार ने जेल मैनुअल मे बदलाव करते हुए जेल से रिहा कर दिया .
आनंद मोहन को निचली अदालत ने 2007 में मौत की सजा सुनाई थी. एक साल बाद पटना उच्च न्यायालय ने सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. मोहन ने तब फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली है.

