SC on religious conversions : ‘आरक्षण का लाभ पाने के लिए सवर्ण समाज के लोग तेजी से धर्मांतरण कर रहे हैं. कई लोग हिंदु धर्म को छोड़ कर बौद्ध धर्म अपना रहे हैं.’ ऐसी जानकारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. दऱअसल दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा से इसी तरह का एक धर्मांतरण का मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आया जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है.
STORY | SC terms grant of minority certificate to upper caste Hindu in Haryana as new type of fraud
The Supreme Court on Wednesday voiced concern over a “new type of fraud” involving individuals from dominant upper-caste backgrounds in Haryana converting to Buddhism solely to… pic.twitter.com/i8jZggXkiQ
— Press Trust of India (@PTI_News) January 28, 2026
SC on religious conversions : ये नई तरह का फर्जीवाड़ा है
ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ‘ये नई तरह का फर्जीवाड़ा है , जहां कथित तौर पर प्रभावशाली जातियों के लोग केवल अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ लेने के लिए बौद्ध धर्म अपना रहे हैं.’
मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने हरियाणा के चीफ सेकरेट्री से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. हरियाणा से आये मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट मे मुख्य न्यायधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ में हो रही है. ये मामला हरियाणा के हिसार जिले के एक युवक निखिल कुमार पुनिया नामक के छात्र का है, जिसपर आरोप है कि उसने खुद को बौद्ध धर्म का अनुयायी बता कर अल्पसंख्यक कोटे के तहत एडमिशन की मांग की थी.
छात्र के अल्पसंख्यक होने पर सीजेआई ने पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान छात्र निखिल पुनिया के बैकग्राउंड के बारे में सीजेआई ने सवाल किया तो निखिल के वकील ने बताया कि उनका मुवक्किल जाट पुनिया समाज से आता है . इसपर CJI ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, ‘आप पुनिया हैं, फिर अल्पसंख्यक कैसे हुए?’’ ‘आप बताये कि आप कौन से पुनिया हैं?’ इस पर छात्र के वकील ने तर्क दिया कि धर्मांतरण करने का अधिकार उनके मुवक्किल के पास है और अब वो पुनिया नहीं बल्कि एक बौद्ध है. वकील की इस दलील को सीजेआई ने धोखाधड़ी बताया और याचिका खारिज कर दी.
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से मांगा जवाब
छात्र के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए. शीर्ष अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है कि किस आधार पर राज्य में अल्पसंख्यक होने का प्रमाण पत्र बांटा जाता है.
कोर्ट ने पूछा है कि राज्य में अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए नियम और गाइडलाइंस क्या हैं?
क्या ऐसा कोई उम्मीदवार जो सामान्य वर्ग से आता हो,आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EWS) से भी नहीं आता हो और धर्म बदलकर रातों-रात अल्पसंख्यक बन जाये तो उसे क्या राज्य अलपसंख्यक का दर्ज दे देगा ?
सीजेआई ने हरियाणा सरकार से सवाल किया कि अगर किसी छात्र ने पहले खुद को सामान्य श्रेणी का बताया तो वो केवल धर्म बदलकर खुद को अल्पसंख्यक घोषित कर सकता है?
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
हमारे देश में धर्म के आधार पर अल्पसंख्यकों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में खास आरक्षण मिलते हैं. हरियाणा जैसे राज्य में जाट समुदाय अपर कास्ट है और प्रभावशाली वर्ग में गिने जाते हैं. ऐसे में संवैधान पीठ ये मानता है कि अगर इस तरह के धर्मांतरण को मान्यता दी जाने लगी तो ये उन वास्तविक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को हनन होगा, जिन्हें वास्तव में आरक्षण और संरक्षण की आवश्यकता है.
सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी आने वाले समय में धार्मिक स्वतंत्रता और आरक्षण के बीच की कानूनी सीमा तय करने में नजीर बन सकता है. कोर्ट को हरियाणा सरकार के जवाब का इंतजार है.

