केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक Sonam Wangchuk की हिरासत के बाद से 24 बार मेडिकल जांच हो चुकी है और वह “फिट, तंदुरुस्त” हैं और चिंता की कोई बात नहीं है.
वांगचुक फिट, स्वास्थ्य और तंदुरुस्त हैं- सॉलिसिटर जनरल
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच को बताया कि जिन आधारों पर वांगचुक को हिरासत में लेने का आदेश दिया गया था, वे जारी हैं और सेहत के आधार पर उन्हें रिहा करना मुमकिन नहीं होगा.
“हमने समय-समय पर 24 बार उनकी हेल्थ की जांच की है. वह फिट, स्वास्थ्य और तंदुरुस्त हैं. उन्हें पाचन संबंधी कुछ दिक्कत थी, उनका इलाज चल रहा है. चिंता की कोई बात नहीं है, कोई चिंता की बात नहीं है. हम इस तरह की छूट नहीं दे सकते.”
मेहता ने बेंच से कहा, “जिन वजहों से हिरासत का आदेश दिया गया था, वे जारी हैं. हेल्थ के आधार पर उन्हें रिहा करना मुमकिन नहीं होगा. यह शायद सही भी न हो. हमने इस पर बहुत सोचा है.”
सरकार ने कहा- वांगचुक हिंसक विरोध प्रदर्शनों में मुख्य भड़काने वाले थे
सुनवाई के दौरान, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि वांगचुक हिंसक विरोध प्रदर्शनों में मुख्य भड़काने वाले थे और उन्होंने नेपाल और अरब स्प्रिंग का उदाहरण देकर युवाओं को भड़काया था.
नटराज ने कहा कि वांगचुक ने नेपाल में हिंसक आंदोलन का ज़िक्र किया और कहा कि भारत में भी ऐसा ही हो सकता है.
इस मौके पर, बेंच ने पूछा, “वह ऐसा कहाँ कह रहे हैं? वह कह रहे हैं कि उन्होंने इसे ले लिया है. वह खुद हैरान हैं.”
ASG ने जवाब दिया कि बयान का मतलब निकालना होगा.
कोर्ट ने ASG को क्यों कहा कि ‘आप बहुत ज़्यादा पढ़ रहे हैं’
नटराज ने कहा, “प्लीज़ अगले पॉइंट पर आइए. वह कहते हैं कि लद्दाख में आर्म्ड फोर्सेज़ की तैनाती दुर्भाग्यपूर्ण है. वह कहते हैं कि युवा कहते हैं कि शांतिपूर्ण तरीके असरदार साबित नहीं हुए हैं.”
फिर बेंच ने कहा, “वह कह रहे हैं कि युवा ऐसा कह रहे हैं. पूरा वाक्य पढ़ें. वह कह रहे हैं कि यह चिंता की बात है. अगर कोई यह कहता है कि हिंसक तरीका सही तरीका नहीं है. आप बहुत ज़्यादा पढ़ रहे हैं.”
Sonam Wangchuk की पत्नी ने कोर्ट में क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की दायर हेबियस कॉर्पस पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 के तहत उनकी हिरासत को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की गई थी.
NSA केंद्र और राज्यों को लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है ताकि वे “भारत की रक्षा के लिए नुकसानदायक” तरीके से काम करने से रोक सकें. हिरासत की ज़्यादा से ज़्यादा अवधि 12 महीने है, हालांकि इसे पहले भी रद्द किया जा सकता है.
अंगमो ने कहा कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को किसी भी तरह से वांगचुक के कामों या बयानों से नहीं जोड़ा जा सकता.
अंगमो ने कहा कि वांगचुक ने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल के ज़रिए हिंसा की निंदा की और साफ तौर पर कहा कि हिंसा से लद्दाख की “तपस्या” और पांच साल की शांतिपूर्ण कोशिश नाकाम हो जाएगी, और यह उनकी ज़िंदगी का सबसे दुखद दिन था.

